ज्योतिर्मठ में आदि शंकराचार्य जयंती पर भव्य धार्मिक आयोजन, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने की विशेष पूजा-अर्चना

ज्योतिर्मठ में आदि शंकराचार्य जयंती पर भव्य धार्मिक आयोजन, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने की विशेष पूजा-अर्चना

स्थान : चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के पवित्र ज्योतिर्मठ स्थित ज्योतिष्पीठ में बुधवार आदि गुरु शंकराचार्य भगवान के प्रकट्योत्सव के अवसर पर भव्य धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया गया। पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।

इस अवसर पर ज्योतिष्पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने विशेष रूप से सभी धार्मिक अनुष्ठानों में सहभाग किया। सुबह से ही विभिन्न पूजन और अनुष्ठानों का क्रम प्रारंभ हो गया था।

प्रातःकाल स्वामी जी महाराज ने उस ऐतिहासिक गुफा में पूजा-अर्चना की, जहां लगभग 2500 वर्ष पूर्व आदि गुरु शंकराचार्य जी ने बैठकर ‘प्रस्थानत्रयी’ ग्रंथ पर भाष्य की रचना की थी। इस पावन स्थल पर गुरु पादुका स्तोत्र का पाठ भी विधिवत संपन्न हुआ।

इसके पश्चात नृसिंह मठ परिसर स्थित मूल ज्योतिर्मठ में विराजमान सभी देवविग्रहों के दर्शन और पूजन किए गए। इसके बाद आदि शंकराचार्य भगवान की अष्टोत्तर शतनामावली से विशेष अर्चना कर आरती संपन्न की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कार्यक्रम के दौरान कल्पवृक्ष, ज्योतिरीश्वर और माता पूर्णागिरि देवी के भी दर्शन एवं पूजन किए गए। श्रद्धालुओं ने इन सभी धार्मिक अनुष्ठानों में गहरी आस्था के साथ भाग लिया और वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

सांयकालीन सत्र में चौसठ योगिनी सभागार में एक विशेष धार्मिक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संत-भक्त और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक प्रवचनों से माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक बना रहा।

आदि शंकराचार्य के प्रकट्योत्सव के अवसर पर हुए इन आयोजनों ने ज्योतिर्मठ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को और अधिक सुदृढ़ किया। पूरे दिन क्षेत्र में भक्ति, साधना और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।