जौनसार-बावर में बिस्सू पर्व की धूम, रायगी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

जौनसार-बावर में बिस्सू पर्व की धूम, रायगी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

स्थान : देहरादून
ब्यरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में पारंपरिक बिस्सू पर्व की शुरुआत के साथ ही पूरे इलाके में आस्था, संस्कृति और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। रायगी मंदिर में आयोजित मेले में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

पर्व की शुरुआत पारंपरिक ‘फूलियाता’ से होती है, जिसमें ग्रामीण जंगलों से बुरांश के फूल एकत्र कर अपने आराध्य देव और घरों को सजाते हैं। ढोल-दमाऊ की थाप और रणसिंघे की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

इस अवसर पर 28 गांवों के लोग शेडकुडिया महाराज के दरबार में पहुंचे और देवता की पालकी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

बिस्सू पर्व में रिश्तों की मिठास भी विशेष महत्व रखती है। परंपरा के अनुसार घरों में विशेष पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं और ससुराल गई बेटियों को ‘बांटा’ भेजा जाता है, जिससे पारिवारिक रिश्ते और मजबूत होते हैं।

मेले में लोक संस्कृति की झलक भी स्पष्ट दिखाई दी, जहां युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। ठोउड़ा नृत्य इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें युवाओं ने तीर-कमान के साथ पारंपरिक युद्धकला का शानदार प्रदर्शन किया।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। युवाओं में अपनी परंपरा के प्रति गर्व और जुड़ाव साफ देखने को मिला।

बुरांश की खुशबू, लोक परंपराओं की झलक और आस्था की शक्ति—यही जौनसार-बावर की अनोखी पहचान को और अधिक जीवंत बनाती है।