

स्थान : पंतनगर
ब्यूरो रिपोर्ट

गोविन्द वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के 37वें दीक्षांत समारोह का आयोजन भव्य रूप से किया गया। इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस प्रेरणादायी समारोह में देश की ऊर्जावान अमृत पीढ़ी से संवाद करना उनके लिए गर्व और खुशी का विषय है। उन्होंने सभी सफल विद्यार्थियों को उनकी मेहनत और समर्पण के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।


उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्रियां बांटने का अवसर नहीं है, बल्कि यह देश के कृषि इतिहास, संघर्ष और उपलब्धियों का उत्सव भी है। यह वह क्षण है, जब हम अतीत से सीख लेकर भविष्य के लिए नए संकल्प लेते हैं।


राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और अभिभावकों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता के पीछे गुरुजनों और परिवार का महत्वपूर्ण योगदान होता है, जो उन्हें सही दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने देश की आजादी के समय की कृषि चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि 1947 में भारत खाद्यान्न की भारी कमी और आयात पर निर्भरता से जूझ रहा था। उस समय देश की स्थिति “शिप-टू-माउथ इकोनॉमी” जैसी थी, जिसे मेहनत और वैज्ञानिक प्रगति से बदला गया।

उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्थान ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फसलें विकसित करने, जल संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण देने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह विश्वविद्यालय उत्तराखंड को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में मॉडल राज्य बनाने में मदद करेगा।

इस अवसर पर कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने बताया कि समारोह में 1384 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 721 छात्र और 664 छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विश्वविद्यालय ने आम की एक नई किस्म विकसित की है, जिसका नाम “सिंदूर” रखा गया है, और भविष्य की योजनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

