

अमेरिकी-ज़ायोनी हमले के बाद मलबे में तब्दील हुई शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की इमारत में एक तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। आईटी सेंटर को निशाना बनाने के बाद भी विश्वविद्यालय के आईटी हेड और गणित के प्रोफेसर ने खंडहर की टूटी मेज पर बैठकर ऑनलाइन क्लास ली। यह सिर्फ एक शैक्षणिक सत्र नहीं था, बल्कि शिक्षा और साहस का प्रतीक बन गया।


मलबे के ढेर के बीच बैठकर प्रोफेसरों ने छात्रों को गणित के थ्योरम्स समझाए। इमारतें भले ही गिर गई हों, लेकिन इस क्लास ने साबित किया कि अगर इंसान का हौसला मजबूत हो, तो कोई भी हथियार या धमकी उसकी शिक्षा की चाह को रोक नहीं सकती।

यूनिवर्सिटी के आईटी सेंटर, जो कभी ईरान की तकनीकी प्रगति का प्रतीक था, हमले के बाद पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। आमतौर पर ऐसी परिस्थितियों में लोग भय के कारण घरों में दुबक जाते हैं, लेकिन प्रोफेसरों ने डर को मात दी और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण दिखाया।

हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी थी। इस धमकी ने वहां के नागरिकों और छात्रों में मानसिक दबाव पैदा किया। बावजूद इसके, यूनिवर्सिटी में शिक्षा जारी रखी गई और छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई के जरिए जोड़ने का प्रयास किया गया।

इस घटना ने स्पष्ट संदेश दिया कि युद्ध और विनाश भौतिक संरचनाओं को ध्वस्त कर सकते हैं, लेकिन शिक्षा और ज्ञान की आग को कभी नहीं। प्रोफेसरों की यह पहल देश और दुनिया के लिए एक प्रेरणा बन गई।
शरीफ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी अपने प्रोफेसरों के साहस की सराहना की और कहा कि यह अनुभव उन्हें शिक्षा और मेहनत की ताकत का सच्चा एहसास दिलाता है। यह क्लास केवल गणित नहीं, बल्कि दृढ़ता और प्रतिरोध का सबक भी थी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि प्रभावित आईटी सेंटर को जल्द ही पुनर्निर्माण किया जाएगा। लेकिन इस घटना ने यह दिखा दिया कि ईरान का भविष्य उसके शिक्षकों और छात्रों की प्रतिबद्धता में सुरक्षित है, और कोई भी धमकी या हमला इसे रोक नहीं सकता।


