
स्थान : चंपावत
ब्यरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के चंपावत जनपद में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुपालन में शनिवार को सभी तहसीलों में ‘राजस्व लोक अदालत’ का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य लंबे समय से लंबित राजस्व मामलों का त्वरित और सुलभ समाधान करना रहा।


इस विशेष अभियान के तहत तहसीलदार, उपजिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी न्यायालयों में सुनवाई करते हुए आपसी सुलह और सहमति के आधार पर मामलों का निस्तारण किया गया। प्रशासन द्वारा आमजन को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए यह पहल प्रभावी साबित हुई।


जनपद में कुल 80 से अधिक राजस्व वादों पर सुनवाई हुई, जिनमें अधिकांश मामलों का समाधान आपसी समझौते से किया गया। तहसील स्तर पर चंपावत में 6 में से 6, लोहाघाट में 6 में से 4, पूर्णागिरि में 5 तथा पाटी में 2 में से 2 मामलों का निस्तारण किया गया।


वहीं उपजिलाधिकारी न्यायालयों में चंपावत में 7 के सापेक्ष 11, लोहाघाट में 14 में से 13, पूर्णागिरि में 7 में से 7 तथा पाटी में 2 में से 1 मामले का समाधान किया गया। अपर जिलाधिकारी न्यायालय में भी 3 में से 2 मामलों का सफल निस्तारण किया गया।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि जनपद के सभी विकासखंडों को ‘राजस्व वाद मुक्त’ बनाने के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न्याय प्रक्रिया को गति मिल रही है।

जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि वे अपने लंबित राजस्व मामलों का समाधान आपसी सुलह और समझौते के माध्यम से करें। इससे न केवल समय और धन की बचत होती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द भी मजबूत होता है।

प्रशासन का मानना है कि ‘राजस्व लोक अदालत’ जैसे प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे, जिससे आम जनता को त्वरित न्याय उपलब्ध कराया जा सके और न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम हो।

