
स्थान : रानीखेत
रिपोर्टर : संजय जोशी

उत्तराखंड के प्रसिद्ध चौबटिया उद्यान में काश्तकारों के लिए आधुनिक बागवानी पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में नीदरलैंड से आए वैज्ञानिक पीटर वान रिज्न ने किसानों और उद्यान विभाग से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।


प्रशिक्षण कार्यक्रम में अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ सहित प्रदेश के पांच जिलों से आए काश्तकारों, उद्यान कर्मचारियों और अधिकारियों ने भाग लिया। करीब 90 प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम में शामिल होकर फलदार बागों के बेहतर प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों को सीखा।


कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को फलदार पेड़ों की वैज्ञानिक तरीके से कटाई-छंटाई की प्रक्रिया समझाई। साथ ही कैनोपी मैनेजमेंट और बागों की बेहतर देखभाल से जुड़ी कई आधुनिक विधियों की जानकारी भी दी गई।


प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि यदि पेड़ों की समय पर और सही तरीके से छंटाई की जाए तो बागों की उत्पादकता और फलों की गुणवत्ता दोनों में काफी सुधार हो सकता है। इसके अलावा बागों के समुचित प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशिक्षण में शामिल काश्तकारों ने इसे बेहद उपयोगी बताया। उनका कहना था कि इस तरह के प्रशिक्षण से उन्हें अपने बागों की देखभाल के बेहतर तरीके सीखने को मिले हैं, जिससे भविष्य में उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
नीदरलैंड से आए वैज्ञानिक पीटर वान रिज्न ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानी की अपार संभावनाएं हैं। यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और वैज्ञानिक तरीके से बागों का प्रबंधन करें तो उनकी आय में भी वृद्धि हो सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि बागवानी को बढ़ावा देकर पहाड़ों से हो रहे पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है। उल्लेखनीय है कि चौबटिया गार्डन में भारत सरकार और नीदरलैंड के सहयोग से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जा रही है, जिसकी प्रगति का जायजा लेने के लिए वैज्ञानिक पीटर वान रिज्न यहां पहुंचे थे।

