
स्थान – अल्मोड़ा
ब्यूरो रिपोर्ट

गर्मियों के मौसम के आते ही उत्तराखंड के जंगलों में आग की घटनाएँ बढ़ने लगी हैं। अल्मोड़ा जनपद में मार्च के महीने से ही जंगलों में आग लगने की घटनाएँ शुरू हो गई हैं, जिससे वनों से निकलने वाला धुआँ और प्रदूषण भी बढ़ने लगा है।


पिछले वर्षों में जंगलों की आग से केवल जनहानि ही नहीं हुई, बल्कि लाखों रुपये की वन सम्पदा भी नष्ट हो गई थी। इसके बावजूद वन महकमा द्वारा आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे, लेकिन जंगलों में लगाई जा रही आग को रोकने में कई बार नाकामी देखने को मिली।


इस बार वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने जंगलों में आग रोकने के लिए विशेष तैयारियाँ की हैं। निगरानी बढ़ाने के लिए कूरु स्टेशनों की संख्या बढ़ाई गई है और ग्रामीणों के साथ-साथ संबंधित विभागों को भी अलर्ट किया गया है।


वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार समय रहते आग पर नियंत्रण पाने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने आग लगने की संभावित जगहों पर फायर ब्रेक बनाने और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग की तैयारियाँ सराहनीय हैं, लेकिन जंगलों में आग रोकने के लिए ग्रामीणों का सहयोग भी जरूरी है। बिना जनता की भागीदारी के आग को रोक पाना मुश्किल है।
विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों की आग न केवल वनों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण बढ़ाकर स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती है।

अब देखना होगा कि वन विभाग की तैयारियाँ कितनी कारगर साबित होती हैं और इस साल जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने में विभाग कितना सफल होता है। आने वाला समय ही बताएगा कि इस बार नुकसान कम होगा या नहीं।

