

स्थान : रानीखेत
रिपोर्टर : संजय जोशी


रानीखेत स्थित हजरत कालू सैय्यद बाबा की मजार पर चल रहे वार्षिक उर्स समारोह के तहत बुधवार देर रात मजार परिसर में भव्य कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कौमी एकता, प्रेम और गंगा-जमुनी तहजीब की सुंदर झलक देखने को मिली।


उर्स के दौरान कुरान ख्वानी के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में कवियों और शायरों ने देशभक्ति, इंसानियत और भाईचारे पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। देर रात तक मजार परिसर शायरी और नज़्मों से गूंजता रहा।



कार्यक्रम में अल्मोड़ा से आए कवि नीरज पंत, ध्रुव टम्टा, रानीखेत के अखलाक अहमद, मोहम्मद फहीम और कंचन कुमार तिवारी सहित अन्य शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मोहब्बत, भाईचारे और बाबा की शान में शानदार कलाम पेश किए।


कवि सम्मेलन में प्रस्तुत पंक्तियों ने माहौल को भावनात्मक और आध्यात्मिक बना दिया। शायरों ने अपनी रचनाओं में कहा कि कालू सैय्यद बाबा के दर पर आने वाला हर व्यक्ति खाली नहीं लौटता, बल्कि उसकी झोली रहमतों से भर जाती है।

कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि यह मजार केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सद्भाव का प्रतीक भी है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग एक साथ शामिल होकर भाईचारे का संदेश देते हैं।


मजार के खादिम मोहम्मद मोहसिन ने बताया कि यह उर्स समारोह हर वर्ष आयोजित किया जाता है और इसमें सभी धर्मों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता को मजबूत करने का कार्य करता है।


मुशायरे की अध्यक्षता धारा बल्लभ पांडे ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ कवि नीरज पंत ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी कवियों और शायरों को सम्मानित भी किया गया।
उर्स के दूसरे दिन भी नमाज-ए-असर और कुरान ख्वानी के बाद रात्रि मुशायरा आयोजित किया गया, जो देर रात तक चला और जिसमें बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
यह पूरा आयोजन रानीखेत में धार्मिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया है, जहां विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ मिलकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

