
स्थान : ऋषिकेश

ब्यूरो रिपोर्ट

ऋषिकेश के निकट गंगा भोगपुर कोड़िया में वन गुर्जरों का पारंपरिक सेला पर्व आयोजित किया गया, जिसमें उनकी जंगल से जुड़ी संस्कृति की झलक देखने को मिली।


यह आयोजन लोगों को वन गुर्जर समुदाय की जंगल जीवन शैली और सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू कराने वाला रहा।

मुख्य अतिथि के रूप में पशुपालन विभाग के डायरेक्टर डॉ. उदय शंकर कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने हाई-प्रोफाइल कार्यक्रमों की तरह रिबन नहीं बल्कि नारियल की रस्सी खोलकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जो कार्यक्रम की पारंपरिक भावना को दर्शाता है।

डायरेक्टर ने गुर्जरों की जंगल जीवन शैली को बारीकी से देखा और समझा। उन्होंने इस दौरान गुर्जरों के बनाए हुए खाद्य उत्पादों और हस्तशिल्प प्रदर्शनी का निरीक्षण किया और उनकी कला की जमकर प्रशंसा की।


डॉ. उदय शंकर ने कहा कि सरकार की ओर से वन गुर्जरों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उनका उद्देश्य है कि अधिक से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ इन परिवारों तक पहुँच सके।

डायरेक्टर ने विशेष रूप से बताया कि गुर्जरों को बैंक लोन और अन्य नागरिक सुविधाएं दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
कार्यक्रम में गंगा भोगपुर, हरिद्वार जिले के गेंड़ी खाता और आसपास के इलाकों से पहुंचे वन गुर्जरों ने सरकार से एससी का दर्जा देने की मांग भी रखी।

तीन दिन तक चलने वाले इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में आने वाले लोगों को जंगल मक्खी का शुद्ध शहद और
गुर्जरों द्वारा पालने वाली भैंसे के दूध का शुद्ध घी खरीदने का भी मौका मिलेगा। इस तरह यह पर्व वन गुर्जरों की संस्कृति और जीविका दोनों को उजागर करता है।

