
स्थान – देवाल (चमोली)
ब्यूरो रिपोर्ट

आजादी के 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी विकासखंड देवाल की पिंडर घाटी के सौरीगाड़, उदयपुर, खेता, मानमती, रामपुर, तोरती सहित कई गांवों में संचार सुविधा सुचारु नहीं हो पाई है। नेटवर्क की गंभीर समस्या के चलते ग्रामीणों को रोजमर्रा के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


ग्रामीणों का कहना है कि नेटवर्क न होने के कारण आपात स्थिति में सूचना देना तक मुश्किल हो जाता है। सरकार जहां डिजिटल इंडिया की बात कर रही है, वहीं इन गांवों में राशन कार्ड, मनरेगा केवाईसी, ग्राहक सेवा केंद्र (सीएससी) सहित अन्य सरकारी कार्य ठप पड़े हैं। मोबाइल नेटवर्क के अभाव में लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

खेता-मानमती निवासी प्रकाश राम ने बताया कि पिंडर घाटी में बीएसएनएल के चार टावर 4जी सैचुरेशन योजना के तहत लगाए गए हैं, लेकिन वे पूरी तरह निष्क्रिय हैं। तोरती गांव का टावर मुनियालीखेत नाम से, बजाई नाम से कुंवरपाटा में, हरमल नाम से उदयपुर में और खेता गांव के 2जी टावर को 4जी में अपग्रेड किया गया है, लेकिन इनमें से कोई भी टावर सही से कार्य नहीं कर रहा।


विभाग दावा कर रहा है कि टावर सुचारु हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे उलट है। उन्होंने बताया कि विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री और देहरादून में सीजीएम से पत्राचार और मुलाकात के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। वहीं आठ साल पहले लगाया गया जियो टावर भी आज तक चालू नहीं हो पाया।
पूर्व सैनिक दान सिंह गड़िया ने बताया कि वर्ष 2008 में बीएसएनएल का जो टावर लगाया गया था, वह बेहतर तरीके से काम कर रहा था, लेकिन 4जी के नाम पर नए टावर लगने के बाद संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय जियो और वोडाफोन के टावरों को भी सही ढंग से चलने नहीं दिया गया। उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से जल्द दूरसंचार व्यवस्था सुधारने की मांग की और चेतावनी दी कि मांग पूरी न होने पर 2027 विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।


देवाल के ब्लॉक प्रमुख तेजपाल रावत ने कहा कि पिंडर घाटी के कई गांव आज भी नेटवर्क से वंचित हैं। इस संबंध में उन्होंने सांसद गढ़वाल अनिल बलूनी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बातचीत की थी, जिन्होंने 5-6 महीने के भीतर संचार सुविधा बहाल करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पिंडर घाटी को शीघ्र नेटवर्क से जोड़ा जाए, यह उनकी प्राथमिकता है।

वहीं ग्रामीण पुष्कर सिंह दानू, पान सिंह बिष्ट, शेर सिंह दानू, कलम सिंह दानू, प्रेम सिंह दानू, दीवान सिंह बिष्ट और नंदन सिंह दानू सहित अन्य लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन के साथ-साथ 2027 विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का रास्ता अपनाएंगे।

