खटीमा नगर पालिका पर स्लॉटर हाउस टेंडर में पारदर्शिता पर सवाल, उठे ‘पर्दादारी’ के आरोप

खटीमा नगर पालिका पर स्लॉटर हाउस टेंडर में पारदर्शिता पर सवाल, उठे ‘पर्दादारी’ के आरोप

स्थान – खटीमा ऊधम सिंह नगर

रिपोर्ट – अशोक सरकार

खटीमा नगर पालिका एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। मामला 26 नवंबर 2025 को हुए स्लॉटर हाउस टेंडर से जुड़ा है, जिसको लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं

कि नगर पालिका प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता को दरकिनार कर ‘पर्दादारी’ का खेल खेला है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर करोड़ों रुपये के इस टेंडर की सूचना उन बड़े अखबारों से क्यों गायब रही, जिन्हें आम जनता रोज पढ़ती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी खटीमा नगर पालिका में कोई छोटा कार्यक्रम या आयोजन होता है, तो उसकी सूचना अमर उजाला, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, पंजाब केसरी, उत्तर उजाला, अमृत विचार और दैनिक भास्कर जैसे बड़े और लोकप्रिय अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित की जाती है। लेकिन स्लॉटर हाउस जैसे बड़े और महत्वपूर्ण टेंडर के मामले में इन अखबारों से दूरी क्यों बनाई गई, यह समझ से परे है।

आरोप है कि टेंडर का विज्ञापन केवल शाह टाइम्स, उत्तर केसरी और जन एक्सप्रेस जैसे सीमित प्रसार वाले अखबारों में ही प्रकाशित किया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं जानबूझकर सूचना को सीमित नहीं रखा गया, ताकि आम जनता और स्थानीय ठेकेदारों को इसकी भनक न लगे।

इस मुद्दे को लेकर खटीमा के बेरोजगार युवाओं और स्थानीय व्यापारियों में भारी रोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि टेंडर की जानकारी स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय अखबारों में प्रकाशित होती, तो कई स्थानीय युवक भी इसमें भाग ले सकते थे। आरोप है कि स्थानीय युवाओं को मौका देने के बजाय उत्तराखंड से बाहर के व्यक्तियों को टेंडर आवंटित कर दिया गया।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए रची गई एक साजिश प्रतीत होती है। यदि टेंडर की सूचना अमृत विचार या उत्तर उजाला जैसे स्थानीय अखबारों में दी जाती, तो प्रतिस्पर्धा बढ़ती और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होती। बाहरी लोगों को प्राथमिकता देना और सूचना को सीमित रखना नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस मामले में नगर पालिका खटीमा की अधिशासी अधिकारी प्रियंका सिंह का कहना है कि सभी मानकों को पूरा करते हुए टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई है और उत्तराखंड के बाहर उत्तर प्रदेश के छह लोग टेंडर में प्रतिभाग कर रहे हैं। उन्होंने नियमों के अनुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन आरोपों पर कोई ठोस सफाई देगा या फिर इस कथित ‘टेंडर के खेल’ की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। फिलहाल खटीमा की जनता इस पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है।