
स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट
हरिद्वार स्थित विश्व प्रसिद्ध तीर्थ हर की पैड़ी पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाले बोर्ड लगाए जाने के बाद संत समाज ने इसका खुलकर समर्थन किया है। साधु-संतों का कहना है कि गंगा सभा द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है और इससे हर की पैड़ी की धार्मिक मर्यादा और पवित्रता बनी रहेगी।


संतों ने कहा कि हर की पैड़ी केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। यहां गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, ऐसे में इसकी गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है।

संत समाज का तर्क है कि जिस प्रकार मक्का-मदीना में गैर मुस्लिमों का प्रवेश प्रतिबंधित है और वेटिकन सिटी में भी अन्य धर्मों के लोगों के लिए नियम निर्धारित हैं, उसी तरह हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थल हर की पैड़ी पर भी गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध होना चाहिए।

साधु-संतों ने यह भी कहा कि यह निर्णय किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि धार्मिक स्थलों की परंपरा, आस्था और नियमों की रक्षा के लिए लिया गया है। इससे श्रद्धालुओं की भावनाओं को सम्मान मिलेगा और धार्मिक वातावरण बना रहेगा।


संतों ने प्रशासन से भी अपील की कि वह ब्रिटिश कालीन म्युनिसिपालिटी नियमों का सख्ती से पालन कराए। उनका कहना है कि पहले से ही हर की पैड़ी और आसपास के क्षेत्रों के लिए नियम तय हैं, लेकिन उनका सही ढंग से अनुपालन नहीं हो पा रहा है।

संत समाज का मानना है कि यदि नियमों का सख्ती से पालन किया गया, तो अव्यवस्था, अनुशासनहीनता और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं पर रोक लगेगी। इससे हरिद्वार की पहचान एक पवित्र तीर्थ नगरी के रूप में और मजबूत होगी।


गौरतलब है कि हर की पैड़ी पर लगाए गए इन बोर्डों को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन संत समाज के समर्थन के बाद गंगा सभा के इस फैसले को धार्मिक परंपराओं की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

