


स्थान – हरिद्वार
रिपोर्ट – धर्मराज


आज हरिद्वार में जिला पंचायत की बोर्ड बैठक आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। बैठक के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी ने बताया कि गांवों में तालाबों के विकास, सड़कों के निर्माण, नालियों, पेयजल और बिजली से संबंधित प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया है।



बैठक में एक अहम सामाजिक मुद्दे पर भी विशेष ध्यान दिया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में अनुसूचित जाति की महिलाओं को किसी व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत स्थानीय परंपरा के अनुसार तीन दिन बाद कपड़े बदलने के लिए गांव से बाहर ट्यूबवेल या नल पर जाना पड़ता है। इस दौरान उन्हें असुविधा के साथ-साथ सामाजिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए गांवों के बाहर जल स्रोतों के आसपास महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम बनाए जाने के प्रस्ताव पर बैठक में सहमति बनी, जिसे एक सकारात्मक और संवेदनशील कदम माना जा रहा है।



बैठक में तालाबों के संरक्षण की बात भी की गई, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। जिले के अधिकांश गांवों में तालाबों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं, जिससे न केवल जल स्रोत समाप्त हो रहे हैं बल्कि पर्यावरण संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। हैरानी की बात यह रही कि बैठक में वर्षा जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कोई ठोस चर्चा नहीं की गई।



इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कभी पशुपालन और आजीविका का अहम आधार रही गोचर भूमि पर भी अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं। इससे पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक तालाबों, गोचर भूमि और जल संरक्षण जैसे मूलभूत मुद्दों पर गंभीर और ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक गांवों का समग्र विकास संभव नहीं है। उनका आरोप है कि जिला पंचायत की बैठकों में पारित प्रस्ताव अक्सर कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं, जबकि जरूरत धरातल पर प्रभावी कदम उठाने की है।




