संजीवनी बूटी को वापस लाने की दिशा में काम जारी : राज्यमंत्री बलवीर घुनियाल

संजीवनी बूटी को वापस लाने की दिशा में काम जारी : राज्यमंत्री बलवीर घुनियाल

स्थान – थराली
ब्यूरो रिपोर्ट

जड़ी-बूटी शोध सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री बलवीर घुनियाल ने संजीवनी बूटी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि संजीवनी बूटी हमारे ही क्षेत्र से गई थी, जिसे हनुमान जी द्वारा लाकर भगवान श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण के प्राण बचाए गए थे। अब सरकार और विभाग मिलकर संजीवनी बूटी को वापस खोजने और पहचानने की दिशा में काम कर रहे हैं

मीडिया से बातचीत के दौरान राज्यमंत्री बलवीर घुनियाल ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि जब उन्होंने जड़ी-बूटी बोर्ड का कार्यभार संभाला, तब पता चला कि पिछले 18 वर्षों से बोर्ड की एक भी बैठक नहीं हुई थी और विभाग की कार्यप्रणाली बेहद शिथिल थी। उन्होंने कहा कि कार्यभार संभालते ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जड़ी-बूटी उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

उन्होंने बताया कि घेस, वाण, बलाण और नंदानगर जैसे क्षेत्रों में अब जड़ी-बूटी उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। आज स्थिति यह है कि छोटे से छोटा किसान भी कुटकी की खेती से डेढ़ से दो लाख रुपये तक की आमदनी कर रहा है। राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोग जड़ी-बूटी उत्पादन से जुड़ें, जिससे पलायन रुके और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें

राज्यमंत्री बलवीर घुनियाल ने दोहराया कि संजीवनी बूटी से जुड़ा ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व उत्तराखंड की पहचान है। उन्होंने कहा कि संजीवनी बूटी को पुनः खोजकर उत्तराखंड का नाम देश-दुनिया में रोशन करने की दिशा में प्रयास जारी हैं, और इस पर वैज्ञानिक व शोध स्तर पर कार्य किया जा रहा है।