थेंग गांव में भालू का आतंक बढ़ा, गौशाला तोड़कर दुधारू पशु बने शिकार, ग्रामीणों में आक्रोश

थेंग गांव में भालू का आतंक बढ़ा, गौशाला तोड़कर दुधारू पशु बने शिकार, ग्रामीणों में आक्रोश

स्थान – ज्योर्तिमठ
ब्यूरो रिपोर्ट

ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र के भालू प्रभावित इलाकों में जहां नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन की क्यूआरटी टीम भालू प्रबंधन कॉन्सेप्ट के तहत भालुओं को आबादी से दूर रखने के प्रयास कर रही है, वहीं दूरस्थ और अत्यधिक प्रभावित गांव थेंग में एक बार फिर भालू का आतंक बढ़ गया है।

रविवार देर रात भालू ने थेंग गांव निवासी मोहन सिंह नेगी पुत्र माधो सिंह की गौशाला को तोड़ दिया और वहां बंधी दुधारू गायों व बकरियों को अपना शिकार बना लिया। घटना के बाद पीड़ित परिवार गहरे सदमे और आक्रोश में है। मोहन सिंह का कहना है कि पशुपालन और बकरी पालन ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है, ऐसे में हुए इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है।

क्षेत्र पंचायत सदस्य रमा देवी ने बताया कि थेंग गांव इस सीजन में सबसे अधिक भालू प्रभावित गांवों में शामिल है। पिछले कई महीनों से गांव में भालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।

वहीं जनप्रतिनिधि धन सिंह ने आरोप लगाया कि बीते कुछ महीनों में भालू अब तक 60 से अधिक पालतू मवेशियों को अपना शिकार बना चुके हैं और दर्जनों गौशालाओं को नुकसान पहुंचा चुके हैं। मारे गए पशुओं में अधिकतर दुधारू गायें और बकरियां हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की ओर से केवल गश्त और बैठकों तक सीमित कार्रवाई की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर न तो पशु धन सुरक्षित है और न ही ग्रामीण। पूरे गांव के पशुपालकों में भारी आक्रोश है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग से मांग की है कि गांव में आतंक मचा रहे आक्रामक भालुओं को तत्काल पकड़कर आबादी से दूर भेजा जाए, अन्यथा ग्रामीणों को नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।