मनुस्मृति जलाने की घटनाओं पर संत समाज में आक्रोश, हरिद्वार के संतों ने जताई कड़ी आपत्ति

मनुस्मृति जलाने की घटनाओं पर संत समाज में आक्रोश, हरिद्वार के संतों ने जताई कड़ी आपत्ति

स्थान – हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

हाल के दिनों में मनुस्मृति जलाने की घटनाओं को लेकर धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में नया विवाद खड़ा हो गया है। इन घटनाओं पर हरिद्वार के संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे सनातन परंपरा का अपमान बताया है।

काली सेना के संस्थापक स्वामी आनंद स्वरूप ने इस विषय पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि सनातन धर्म हमेशा शांति और सहिष्णुता का मार्ग अपनाता रहा है, लेकिन अब सहनशीलता की सीमा पार की जा रही है। उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथों का सार्वजनिक रूप से अपमान समाज में वैमनस्य फैलाने का कार्य है।

स्वामी आनंद स्वरूप ने यह भी कहा कि यदि इस प्रकार की घटनाएं लगातार होती रहीं तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने “शांति दोनों पक्षों से बनाए रखने” की बात कहते हुए हिंदू समाज से अपील की कि वे अपने धार्मिक ग्रंथों के सम्मान की रक्षा के लिए संगठित होकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से विरोध दर्ज कराएं।

संत समाज का कहना है कि किसी भी धर्म, ग्रंथ या महापुरुष के अपमान से सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचती है और ऐसे कृत्यों पर रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से भी मांग की कि इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखी जाए।

घटना के बाद प्रशासन और खुफिया एजेंसियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न न हो और शांति व्यवस्था बनी रहे।