

स्थान – रामनगर
संवाददाता – सलीम अहमद साहिल


ग्राम पूछड़ी में वन विभाग और प्रशासन की ओर से की गई बुलडोजर कार्रवाई ने इलाके में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। इस कार्रवाई में केवल दीवारें ही नहीं ढहीं, बल्कि दर्जनों परिवारों के सिर से छत भी छिन गई। कड़ाके की ठंड में बेघर हुए मासूम बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रातें गुजारने को मजबूर हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।



गुरुवार को पीड़ित परिवारों के साथ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने रामनगर तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि ‘विकास’ के नाम पर गरीबों का विनाश बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तहसील परिसर पीड़ितों की सिसकियों और नारों से गूंज उठा।



प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बीते दिनों वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के नाम पर की गई कार्रवाई ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया है। धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं की आंखों में आंसू और बच्चों के मुरझाए चेहरे सरकार की पुनर्वास नीति पर सवाल खड़े कर रहे थे। वक्ताओं ने कहा कि एक ओर सरकार ‘सबका साथ-सबका विकास’ की बात करती है, वहीं दूसरी ओर हाड़ कंपा देने वाली ठंड में लोगों को बेघर किया जा रहा है।



ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बेघर परिवारों के पुनर्वास और उनके सिर पर छत की व्यवस्था नहीं की गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनकी प्रमुख मांगों में वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा देना, ग्राम प्रधान चुनने का अधिकार और जब तक मालिकाना हक नहीं मिलता तब तक बुलडोजर कार्रवाई पर रोक शामिल है।

ग्रामीणों का कहना है कि अब वे आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं और जरूरत पड़ी तो यह आंदोलन बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।


