

स्थान- लामबगड़

ब्यूरो रिपोर्ट


ज्योर्तिमठ प्रखंड के लामबगड़ क्षेत्र से होकर बहने वाली पतित पावनी मां अलकनंदा की अविरल धारा को सड़क निर्माण कार्य में लगी एक कार्यदाई संस्था द्वारा मलवा डंप कर दूषित किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर बेनाकुली लामबगड़ क्षेत्र में स्लाइड जोन से निकाले गए मलवे को रात के अंधेरे में अलकनंदा नदी के किनारे दो अलग-अलग स्थानों पर डंप किया जा रहा है।



लामबगड़ ग्राम पंचायत की ग्राम प्रधान मीना चौहान ने बताया कि जब रात के समय मलवे से लदे डंपरों को हाईवे पर अलकनंदा नदी किनारे खड़ा देखा गया, तब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्मल गंगा–स्वच्छ गंगा अभियान को पलीता लगाने जैसा है। जिस तरह से नदी किनारे मलवे के पहाड़ खड़े किए जा रहे हैं, वह आने वाले बरसात के मौसम में पूरी लामबगड़ घाटी से लेकर निचली अलकनंदा घाटी के गांवों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।



ग्राम प्रधान ने स्पष्ट किया कि स्लाइड जोन से निकले मलवे को प्रदेश सरकार द्वारा तय और अनुमोदित डंपिंग जोन में ही डाला जाना चाहिए, लेकिन चोरी-छिपे रात में नदी किनारे मलवा डंप करने के पीछे का मकसद समझ से परे है। इस संबंध में खनन अधिकारी, वन विभाग समेत संबंधित विभागों को सूचना दिए जाने के बावजूद 72 घंटे बाद भी किसी प्रकार की कार्रवाई या संज्ञान नहीं लिया गया है।



वहीं, वन सरपंच लामबगड़ पुष्पा देवी ने आरोप लगाया कि कार्यदाई संस्था के जिम्मेदार अधिकारी जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधान और सरपंचों के फोन तक उठाने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में ग्रामीण अपनी शिकायत कहां दर्ज कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आने वाली बरसात में इस मलवे के कारण लामबगड़ घाटी में किसी भी प्रकार की क्षति होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कार्यदाई संस्था की होगी।


जनप्रतिनिधियों ने कहा कि वर्ष 2013 की विनाशकारी बाढ़ के बाद भी न तो प्रशासन ने कोई सबक लिया है और न ही सड़क निर्माण से जुड़ी एजेंसियां गंभीर दिखाई दे रही हैं। इसका खामियाजा हर बार लामबगड़ क्षेत्र के ग्रामीणों को ही भुगतना पड़ता है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से अविलंब कार्रवाई कर अलकनंदा नदी को मलवा डंपिंग से बचाने और दोषियों पर सख्त कदम उठाने की मांग की है।



