ज्योतिर्मठ में पैन खंडा महोत्सव की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या, लोक संस्कृति और परंपरा का संगम

ज्योतिर्मठ में पैन खंडा महोत्सव की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या, लोक संस्कृति और परंपरा का संगम

स्थान : ज्योतिर्मठ
ब्यूरो रिपोर्ट

सूबे की प्रथम सरहदी सीमांत नगर ज्योतिर्मठ में पैन खंडा महोत्सव की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय लोकसंस्कृति, परंपरा और पहाड़ी सांस्कृतिक विविधता का शानदार संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम में गढ़वाली, जौनसारी, कुमाऊनी और हिमाचली गीत-संगीत और नाट्य प्रस्तुतियां सजीव रूप में प्रस्तुत की गईं। उर्गम घाटी की गढ़वाली रामलीला का स्वयंबर लीला का मंचन विशेष आकर्षण रहा। वहीं, रवाई जौनसार क्षेत्र की लोक गायिका पद्म श्री रेशमा शाह और स्थानीय लोक गायक दरवान नैथवाल ने पहाड़ी लोकगीतों और नृत्यों से दर्शकों का मन मोह लिया।

दरवान नैथवाल के लोकप्रिय गीत ‘डोलमां स्याली’, श्याम सिंह पटवारी और रेशमा शाह के गीत ‘ले भूजी जाला रे चूड़ा’ ने सांस्कृतिक रंग को और भी जीवंत बना दिया। कार्यक्रम में पांडव जागर और महासू देव की आराधना के साथ पहाड़ी नाटी पर भी जोरदार प्रस्तुति हुई।

कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी और अन्य तमाम अतिथि गण उपस्थित रहे। कड़ाके की सर्द हवाओं के बावजूद नगरवासी अपनी-अपनी पसंद के लोकगीतों और नृत्यों का आनंद उठाते नजर आए। इस सांस्कृतिक संध्या ने पहाड़ी लोक कला और परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर लोगों के दिलों में उत्साह और खुशी भर दी।