

रिपोर्ट – नसीम अहमद
स्थान – अल्मोड़ा


उत्तराखंड सरकार के विकास के दावे अल्मोड़ा में फीके पड़ते नज़र आ रहे हैं। नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा मिले एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक नगर आयुक्त की नियमित तैनाती नहीं हो पाई है।



आयुक्त न होने के कारण नगर निगम के विकास कार्यों का पहिया लगभग थम सा गया है। केवल चार्ज व्यवस्था के सहारे निगम चलाए जाने से न तो बजट स्वीकृत हो पा रहा है और न ही स्थानीय समस्याओं का समय पर समाधान हो रहा है।


40 वार्डों के पार्षद, जनता के आक्रोश का सामना कर रहे हैं। सड़क, सफाई, पेयजल, सीवर लाइन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन स्थाई आयुक्त न होने के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रहीं।

स्थिति से खिन्न होकर पार्षदों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों का कहना है कि जनता उनके ऊपर नाराज है, जबकि वे स्वयं भी बिना आयुक्त के कुछ करने में असहाय हैं।

पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही आयुक्त की तैनाती और अन्य जनहित मुद्दों का समाधान नहीं करती, तो वे धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

स्थानीय नागरिकों का भी यही कहना है कि नगर निगम बनने के बाद विकास तेज होने की उम्मीद थी, लेकिन प्रशासनिक पद खाली रहने से हालात और बिगड़ गए हैं।


सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।


