वंदे मातरम के 150वें वर्ष पर उत्तराखंड में गूंजा राष्ट्रगीत, विरोध पर भाजपा का पलटवार

वंदे मातरम के 150वें वर्ष पर उत्तराखंड में गूंजा राष्ट्रगीत, विरोध पर भाजपा का पलटवार

टॉप- देहरादून

उत्तराखंड के सभी विद्यालयों में वंदे मातरम के 150वें वर्ष पर शुक्रवार को राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया गया। राज्यभर में छात्रों ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

इस बीच कुछ मुस्लिम मौलाना और स्कॉलर द्वारा राष्ट्रगीत के गायन को इस्लाम के विरुद्ध बताए जाने पर नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा नेताओं ने इस विरोध को छोटी मानसिकता करार दिया है।

विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने विरोध करने वालों को कड़ी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा गाया गया गीत है, जिसमें देश के लिए प्राण न्योछावर करने वालों की भावनाएं जुड़ी हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा—
“वंदे मातरम में मां की ही वंदना है, और हर धर्म मां का सम्मान करना सिखाता है। यह न अल्लाह की इबादत है, न ईश्वर की उपासना—बल्कि यह परिक्रमा जैसा भाव है।”

मुफ्ती कासमी ने उदाहरण देते हुए कहा कि काबा में भी लोग इबादत नहीं, बल्कि परिक्रमा करते हैं। इसलिए राष्ट्रगीत के विरोध को उन्होंने अज्ञानता का परिणाम बताया और कहा कि पहले इसके सही मायने समझने चाहिए।

उन्होंने अपील की कि राष्ट्रगीत को धार्मिक नजरिये से न देखा जाए, क्योंकि यह देश के प्रति समर्पण और सम्मान का प्रतीक है।