हल्द्वानी में संविधान दिवस पर मूलनिवासी संघ ने किया पथ संचलन और जागरूकता कार्यक्रम

हल्द्वानी में संविधान दिवस पर मूलनिवासी संघ ने किया पथ संचलन और जागरूकता कार्यक्रम

हल्द्वानी, 26 नवंबर 2025 — मूलनिवासी संघ के नेतृत्व में मंगल पड़ाव स्थित डॉ. अंबेडकर पार्क से पथ संचलन करते हुए बुद्ध पार्क में संविधान दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने संविधान के महत्व और इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

वक्ताओं ने बताया कि भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद जरूर हुआ, लेकिन शासन व्यवस्था अभी भी अंग्रेजों की थी। पूरी स्वतंत्रता के लिए संविधान बनाना आवश्यक था। संविधान का निर्माण 1946 से 26 नवंबर 1949 के बीच हुआ और इसे 26 नवंबर को अंगीकृत किया गया। इसे लागू करने की औपचारिक प्रक्रिया 26 जनवरी 1950 को हुई, जिसे आज हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं।

वक्ताओं ने संविधान सभा की संरचना, 389 सदस्यों में से विभाजन के बाद 284 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर, 13 प्रमुख समितियों और ड्राफ्टिंग कमेटी का विवरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसमें 448 आर्टिकल और 12 अनुसूचियां शामिल हैं।

समारोह में यह भी चर्चा हुई कि 26 जनवरी का त्यौहार स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की पहचान दोनों का प्रतीक है। सभा में संविधान के तहत न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के महत्व पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष मूलनिवासी संघ दीपक चनियाल, मुख्यातिथि सुमित्रा प्रसाद, विशिष्ट अतिथि नफीस अहमद खान, डॉ. प्रमोद कुमार, डी. के. सर, जी. आर. आर्य, आर. पी. गंगोला, आर. आर. लोहिया, जी. आर. टम्टा, बी. एल. आर्य, के. के. बोरा, शंकर लाल, सुंदरलाल बौद्ध, सुनीता आर्य, फ़िरोज़ खान, सखावत हुसैन, आकाश भारती, हरीश लोधी, संजय कुमार टम्टा, महेश चंद्र आर्य, सिराज अहमद, पंकज अम्बेडकर, रितिक कांत, महेश, राजू राजभर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों में संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और संविधान की रक्षा हेतु प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना बताया गया।