

देहरादून। उत्तराखंड में अब राजनीतिक दलों के सामने अगली बड़ी चुनौती वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की है। चुनावी तैयारियों से पहले राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लंबे समय से चल रही कसरत अभी तक अंजाम तक नहीं पहुंच सकी है।

धामी मंत्रिमंडल में कुल 12 पदों में से पाँच सीटें अभी भी रिक्त हैं। वर्तमान में सात मंत्री पदों पर ही नियुक्तियाँ हैं। रिक्त पद भरने को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है, लेकिन लगातार देरी से राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।




राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल को सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस के सीडब्ल्यूसी मेंबर और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब चुनाव बेहद नजदीक हैं, और मौजूदा वर्किंग बोर्ड का कार्यकाल भी केवल पांच से छह महीने का रह गया है। ऐसे में अब मंत्रिमंडल बनाया जाए या नहीं, इससे चुनावी समीकरण पर अधिक फर्क नहीं पड़ेगा।



माहरा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने मंत्रिमंडल की सीटें खाली रखकर जनता का नुकसान किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास योग्य लोग नहीं हैं, और यह स्थिति इस बात से स्पष्ट होती है कि “आज भी 90 प्रतिशत मंत्री और प्रवक्ता कांग्रेस पृष्ठभूमि के हैं।”




