धामी सरकार का ‘गड्ढा मुक्त सड़क’ दावा खोखला? रानीखेत में टूटी सड़कों से जनता बेहद परेशान, नेता भी आमने-सामने

धामी सरकार का ‘गड्ढा मुक्त सड़क’ दावा खोखला? रानीखेत में टूटी सड़कों से जनता बेहद परेशान, नेता भी आमने-सामने

रिपोर्ट:- संजय जोशी
स्थान: – रानीखेत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य की सभी सड़कों को ‘गड्ढा मुक्त’ करने के दावे रानीखेत में पूरी तरह फेल होते नजर आ रहे हैं। शहर की कई मुख्य सड़कों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। बड़े-बड़े गड्ढों और उखड़ चुकी मरम्मत परत को देखकर साफ लग रहा है कि सड़क सुधार कार्य सिर्फ कागजों में सीमित रह गए हैं।

रानीझील जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल तक जाने वाली सड़क भी टूटी-फूटी हालत में है, जिससे स्थानीय लोगों सहित पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय जनता का कहना है कि हर दिन इन सड़कों पर सफर जान जोखिम में डालने जैसा लगता है। लोगों को अब सिर्फ यह उम्मीद है कि सरकार का “गड्ढा मुक्त सड़क” अभियान जल्द धरातल पर दिखे और उन्हें राहत मिल सके।

विधायक प्रमोद नैनवाल बोले — कई सड़कें गड्ढा मुक्त, शेष भी जल्द सुधरेंगी
रानीखेत विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल ने दावा किया कि रानीखेत से रामनगर तक और अन्य मुख्य मार्गों को गड्ढा मुक्त किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि रानीखेत की शहरी सड़कों को लेकर कैंट बोर्ड के सीईओ से वार्ता की जाएगी और जल्द ही इन मार्गों को भी दुरुस्त कराया जाएगा।

कांग्रेस नेता करन माहरा का सरकार पर हमला
वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक करन माहरा ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि रानीखेत की सड़कें इतनी खराब हैं कि यह समझना मुश्किल हो जाता है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सरकार का मुख्यमंत्री सिर्फ ब्रांडिंग पर 1000 करोड़ रुपये खर्च कर दे, उससे सड़क सुधार की उम्मीद करना व्यर्थ है।
माहरा ने कहा कि अगर यही पैसा सड़कों पर खर्च किया जाता तो आज पूरे प्रदेश की सड़कें वास्तव में गड्ढा मुक्त हो सकती थीं।

स्थानीय लोग सड़क सुधार की ओर सरकार से त्वरित और ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।