अखाड़े में उठा विवाद: महामंडलेश्वर स्वामी शिवानंद महाराज के आरोपों से संत समाज में मचा हड़कंप

अखाड़े में उठा विवाद: महामंडलेश्वर स्वामी शिवानंद महाराज के आरोपों से संत समाज में मचा हड़कंप

लोकेशन : हरिद्वार
स्थान : धर्मराज

पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन में उस समय हलचल मच गई जब अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी शिवानंद महाराज ने प्रेस वार्ता के दौरान अपने ही अखाड़े के संतों पर गंभीर आरोप लगाए।
शनिवार को हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत में स्वामी शिवानंद महाराज ने कोठारी महंत मोहन दास महाराज के लापता होने के मामले में अखाड़े के संतों की साजिश का आरोप लगाते हुए कहा कि “अखाड़े के कुछ संत षड्यंत्र रचने के लिए वेश्याओं का सहारा ले रहे हैं।”

महामंडलेश्वर के इन आरोपों ने संत समाज पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। उनका कहना है कि संत भेष में कई लोग गुंडागर्दी, संपत्ति कब्जाने और विलासिता भरे जीवन में लिप्त हैं। स्वामी शिवानंद ने कहा कि “5 से 6 हजार रुपये मासिक आय वाले संत करोड़ों की गाड़ियों में घूम रहे हैं, कुछ तो परिवार बनाकर भी संत का चोला धारण किए हुए हैं।”

उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों में सत्यता है तो यह न केवल संत समाज, बल्कि पूरे सनातन धर्म की आस्था पर कुठाराघात है। उन्होंने मांग की कि अखाड़ा परिषद और धार्मिक संगठन इस मामले पर तत्काल संज्ञान लें और जांच कर कार्रवाई करें।

स्वामी शिवानंद महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि वह महामंडलेश्वर का पद पैसे से नहीं, बल्कि शास्त्रार्थ के आधार पर प्राप्त किया है। उन्होंने कहा, “मैंने यह पद अपने ज्ञान और परंपरा के अनुरूप पाया है, खरीदा नहीं। लेकिन आज अधिकांश अखाड़ों में महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया पूरी तरह व्यावसायिक हो चुकी है — जहां लाखों रुपये खर्च कर कोई भी पद पा सकता है।”

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “अगर चढ़ावा ठीक-ठाक मिल जाए तो आजकल तो चार पैरों वाले को भी महामंडलेश्वर बना सकते हैं।

महामंडलेश्वर के इन बयानों के बाद संत समाज में हड़कंप मचा हुआ है। कई संतों ने इन आरोपों को अखाड़े की गरिमा के खिलाफ बताते हुए नाराज़गी जताई है, वहीं कुछ वरिष्ठ संतों का कहना है कि “स्वामी शिवानंद ने जो मुद्दे उठाए हैं, वे कड़वी सच्चाई हैं और उन पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।”

कुल मिलाकर, धर्म की नगरी हरिद्वार में यह विवाद संत समाज की साख और सनातन परंपरा की पवित्रता पर गहरे सवाल खड़े कर गया है। यदि आरोपों में सच्चाई निकली तो यह न केवल अखाड़ों की साख, बल्कि आस्था और आध्यात्मिकता के प्रति जनता के विश्वास को भी गहरी चोट पहुँचा सकता है।