


लोकेशन – विकासनगर

रिपोर्ट – सतपाल धानिया

वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए कालसी वन प्रभाग की तिमली रेंज से एक सुखद खबर आई है। आरक्षित वन क्षेत्र के जंगलों में हाथियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब यहां लगभग 30 हाथी, जिनमें 10 नन्हे हाथी भी शामिल हैं, देखे गए हैं। इससे साफ है कि तिमली का जंगल अब हाथियों का सुरक्षित प्रजनन केंद्र बन चुका है।




हाल ही में जब दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजर रहे लोगों ने करीब 20 हाथियों के झुंड को सड़क पार करते देखा, तो यह नजारा देखते ही बनता था। लोगों ने इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया। हाथियों के सड़क पार करने के दौरान कुछ समय के लिए हाइवे पर लंबा जाम लग गया, लेकिन नन्हे हाथियों को देख सभी के चेहरे खुशी से खिल उठे।

वनकर्मियों की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और हाथियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर भीड़ को आगे बढ़ाया। इस दृश्य ने यह साबित कर दिया कि तिमली जंगल का पारिस्थितिक संतुलन बेहतर हो रहा है।




वन क्षेत्राधिकारी तिमली पंकज ध्यानी ने जानकारी दी कि तिमली जंगल में इस समय तीन झुंड हाथियों के सक्रिय हैं, जो वन विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि विभाग हाथियों की सुरक्षा और निगरानी पर विशेष ध्यान दे रहा है।
ध्यान देने योग्य कदमों में शामिल हैं:

- जंगल में पानी के स्रोतों की व्यवस्था को सुदृढ़ करना।
- आबादी वाले इलाकों के पास हाथी रोधक दीवारें बनाना।
- रात-दिन हाथियों के मूवमेंट पर नजर रखना।
वन क्षेत्राधिकारी ने कहा कि हाथियों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि तिमली जंगल का पर्यावरण बेहद स्वस्थ और सुरक्षित है।



हालांकि, अचानक इतने बड़े झुंड को देखकर कुछ लोग सहम भी गए, लेकिन यह दृश्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय बना। यह पहला मौका है जब उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से सटी तिमली रेंज में एक साथ इतने हाथी देखे गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वन क्षेत्र में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि यह दर्शाती है कि जंगल का प्राकृतिक संतुलन और जैव विविधता मजबूत हो रही है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग इस नये हाथी प्रजनन केंद्र की सुरक्षा और संरक्षण को किस तरह मजबूत करता है।



