

लोकेशन,, ज्योतिर्मठ (चमोली)
संवाददाता: संजय कुंवर

उत्तराखंड के सरहदी नगर ज्योतिर्मठ में मंगलवार की सुबह ठंड और ठिठुरन के बीच भी लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का उत्सव श्रद्धा और भक्ति के माहौल में सम्पन्न हुआ। गांधी मैदान में बनाए गए अस्थायी पोखर (कुंड) में हजारों व्रती महिलाओं ने जल में उतरकर उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और भगवान भास्कर से परिवार एवं समाज की खुशहाली और समृद्धि की कामना की।




भोर की पहली किरण के साथ ही श्रद्धालुओं ने “छठ मइया के जयकारों” के बीच पूजा-अर्चना की और कठोर व्रत के बाद पारंपरिक विधि से व्रत का समापन किया।

व्रतियों ने बताया कि छठ पर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय-खाय से होती है, इसके बाद पंचमी को खरना, षष्ठी को डूबते सूर्य को अर्घ्य, और सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर यह व्रत पूर्ण किया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती महिलाएं कठोर नियमों का पालन करते हुए 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं।





ठिठुरन भरे मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था अडिग रही। गांधी मैदान का दृश्य मनमोहक था — जल में खड़ी महिलाएं, सूप में रखे फल और दीपों की रोशनी से सजा कुंड, और आसमान में उगते सूर्य की किरणें — पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत नजर आया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि छठ पूजा अब ज्योतिर्मठ में भी लोक एकता और सांस्कृतिक सौहार्द का प्रतीक बन चुकी है। पर्व के समापन के बाद श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को छठ पर्व की शुभकामनाएं दीं और प्रसाद वितरण किया।




