9 नवम्बर से गाजणा क्षेत्र में होगा गुरु चोरंगीनाथ का पौराणिक मेला

9 नवम्बर से गाजणा क्षेत्र में होगा गुरु चोरंगीनाथ का पौराणिक मेला

स्थान: उत्तरकाशी
रिपोर्टर: दीपक नौटियाल

उत्तरकाशी जनपद की चारों घाटियों में आज भी पौराणिक संस्कृति वैसी ही जीवंत है जैसी पौराणिक काल में थी। इसी परंपरा का जीवंत उदाहरण है गुरु चोरंगीनाथ का मेला, जो गाजणा क्षेत्र के पांच गांवों – चोडियाट, दिखोली, सोड, लोदाडा और भेटियारा – में तीन साल में एक बार आयोजित किया जाता है।

मेला पौराणिक संस्कृति, देवताओं पर आस्था और अतिथि देवो भव की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। प्रत्येक घर में मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष पकवान तैयार किए जाते हैं और हर श्रद्धालु को देवता का अंश मानकर भोजन कराया जाता है। खास बात यह है कि मेले के प्रांगण में श्रद्धालुओं की गिनती कर हर घर के हिस्से में बराबर भोजन भेजा जाता है।

इस मेले में कोई मुख्य अतिथि नहीं होता; प्रत्येक श्रद्धालु को देवता का रूप मानकर सम्मान दिया जाता है और जात-पात का कोई भेदभाव नहीं होता।

मेला पांच दिनों तक चलता है, जिसमें सुबह से पूजा-अर्चना, देव डोलियों के साथ नाच-गाना और दोपहर में श्रद्धालुओं को भोजन कराया जाता है। मेला का विशेष आकर्षण है हलुआ देवता, जो गुरु चोरंगीनाथ के साथ चलते हैं। प्रत्येक घर से कद्दू, ककड़ी, दही, घी आदि उन्हें अर्पित किया जाता है। रोचक तथ्य यह है कि हलुआ देवता बिना हाथ लगाए 8 से 10 किलो भोजन करते हैं।

भोजन के पश्चात हलुआ देवता हर श्रद्धालु को विछ्छू घास (कंडाली) लगाते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार जिसे यह कंडाली लगती है, उसे तीन साल तक किसी प्रकार की काली शक्तियों या भूत-प्रेत का प्रभाव नहीं होता। श्रद्धालु प्रसाद के रूप में इस कंडाली को लगवाना सुनिश्चित करते हैं।

किशोरी लाल नौटियाल, अध्यक्ष, गुरु चोरंगीनाथ मेला समिति, ने बताया कि यह मेला धार्मिक, आध्यात्मिक और अतिथि देवो भव परंपरा का जीवंत प्रतीक है। इस बार मेला 9 नवम्बर से आयोजित होगा, और हर श्रद्धालु इस पौराणिक आयोजन का साक्षी बन सकता है।