


स्थान: पौड़ी गढ़वाल
रिपोर्ट: जय ममगाई

जनपद गढ़वाल के ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदार और भालू के आतंक से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। इसको लेकर जिला पंचायत सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर सांकेतिक धरना प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी व्यक्त की।




धरना देने वालों का आरोप है कि जिला अधिकारी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी उनकी सुनवाई तक नहीं कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार, प्रशासन और वन विभाग पीड़ित ग्रामीणों की समस्या को नहीं सुलझाते और उन्हें जंगली जानवरों से सुरक्षा प्रदान नहीं करते, तो गांव-गांव से व्यापक जन आंदोलन शुरू होगा।


कांग्रेस और जिला पंचायत सदस्यों की ओर से जिलाधिकारी उत्तराखंड शासन को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया कि शासन में बैठे आला अफसर और नेता केवल पलायन का ढोंग कर रहे हैं, जबकि गांव में ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है। जिन ग्रामीणों ने पलायन किया है, वे लौटने की स्थिति में नहीं हैं और जो बचे हैं, उनकी कोई चिंता नहीं की जा रही।



जिला पंचायत सदस्य पूनम कैंत्यूरा ने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन जनता के वास्तविक मुद्दों के प्रति बेपरवाह हैं। वन विभाग के पास जंगली जानवरों से निपटने के लिए आवश्यक उपकरण भी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि भले ही विभिन्न गोष्ठियां और सेमिनार आयोजित हो रहे हैं, लेकिन ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कार्य योजना नहीं बनाई गई है।

धरने में जिला पंचायत सदस्य सीमा चमोली, कविता इस्टवाल, कविता डबराल, बुद्धि सिंह, कर्मवीर भंडारी, चंद्र भानु बिष्ट, क्षेत्र पंचायत संजय मिंटू डबराल, सभासद गौरव सागर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनोद नेगी, ब्लॉक अध्यक्ष चाकीसैंण मंगल सिंह, कोट विजय दर्शन बिष्ट, अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष राहत हुसैन, नगर अध्यक्ष भरत सिंह रावत, जिला अध्यक्ष युवा मोर्चा मोहित सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष नेगी सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

प्रदर्शनकारियों ने जोर देकर कहा कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदार और भालू से सुरक्षा की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो यह किसी एक पार्टी का आंदोलन नहीं बल्कि पीड़ित ग्रामीणों का जनआक्रोश बन जाएगा, जिसका जिम्मेदार भविष्य में शासन और प्रशासन होंगे।




