


स्थान: द्वाराहाट
रिपोर्ट: विमल साह

उत्तराखंड की पवित्र नदी गोमती के उद्गम स्थल अंगरिया महादेव को विकसित और प्रसिद्ध करने की मांग को लेकर स्वामी ब्रह्मवधूत डॉ. सुमन्ताश्रम रविवार को इस पवित्र स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह स्थल धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन आज भी उपेक्षित है।





स्वामी सुमन्ताश्रम ने बताया कि अंगरिया महादेव मंदिर ग्वालदम की पहाड़ी पर स्थित है। यहां सप्तऋषियों के पवित्र तालाब से निकली जलधारा को गोमुख (गाय के मुख) के आकार के स्रोत से बहते हुए देखा जा सकता है, जो आगे चलकर गोमती नदी का रूप लेती है। यह नदी आगे बागेश्वर में जाकर सरयू नदी में मिलती है।


उन्होंने कहा कि यह स्थान गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों को जोड़ता है, क्योंकि यहां तक ग्वालदम (कुमाऊं) से और माईथान (गढ़वाल) से पहुंचा जा सकता है। बावजूद इसके, इस स्थल के सौंदर्यीकरण और प्रचार-प्रसार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

स्वामी सुमन्ताश्रम ने बताया कि वे गोमती नदी की परिक्रमा कर रहे हैं, ताकि इसके उद्गम से लेकर संगम तक की धार्मिक और भौगोलिक जानकारी जनता तक पहुंचाई जा सके। उन्होंने कहा कि स्कंद पुराण में भी अंगरिया महादेव और सप्तऋषि ताल का उल्लेख मिलता है, लेकिन आज अधिकांश लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है।


उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थल के विकास के लिए वे जल्द ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर सौंदर्यीकरण और धार्मिक पर्यटन के विस्तार पर वार्ता करेंगे।

स्वामी ने कहा कि “यह हमारी आस्था, संस्कृति और इतिहास से जुड़ा स्थल है, इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए।”




