


पहाड़ से मैदान तक सरकारी जमीनों पर कब्ज़े की खबरें आम हैं, लेकिन हल्द्वानी के गौलापार में सामने आए ताजा मामले ने पूरे सिस्टम की जड़ें हिला दी हैं। यहां करीब 3.107 हेक्टेयर (लगभग 7.6 एकड़) सरकारी जमीन को फर्जी कागजात, झूठे शपथपत्र और अफसरों की मिलीभगत से हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

इस बड़े घोटाले में नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरम्वाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के पुत्र हरेन्द्र सिंह कुंजवाल समेत सात प्रभावशाली लोगों और तत्कालीन राजस्व अधिकारियों पर आरोप लगा है। आईजी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देश पर काठगोदाम पुलिस ने सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


शिकायत में लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता रविशंकर जोशी ने आईजी को दी गई तहरीर में बताया कि यह घोटाला हल्द्वानी तहसील के देवला तल्ला पजाया गांव की सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसे बलवंत सिंह पुत्र मोहन सिंह के नाम पर गलत तरीके से विनियमित (रेगुलराइज) कर दिया गया।

बलवंत सिंह ने शपथपत्र में दावा किया कि उनके पास 12.5 एकड़ की सीलिंग सीमा से अधिक जमीन नहीं है, जबकि शिकायत के मुताबिक उनके पास पहले से ही गौलापार, कुंवरपुर और हल्द्वानी-खास में इस सीमा से कहीं अधिक जमीन दर्ज थी।


आरोप है कि 1991 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने बलवंत सिंह का कब्जा अवैध मानते हुए बेदखली का आदेश दिया था। लेकिन 2011 से 2016 के बीच जब जमीन के विनियमितिकरण की प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई, तो अधिकारियों ने पुराने बेदखली आदेश को दबा दिया और बलवंत सिंह को जमीन का मालिकाना हक दे दिया।

दान के नाम पर बड़ा खेल
विनियमितिकरण के बाद बलवंत सिंह ने 10 मार्च 2016 को यह पूरी 3.107 हेक्टेयर जमीन रविकांत फुलारा नामक व्यक्ति को दान कर दी।
हैरानी की बात यह रही कि इस दाननामे पर 19 लाख रुपये का भारी-भरकम स्टैंप शुल्क जमा किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर रविकांत फुलारा के लिए इतनी बड़ी राशि जमा करना असंभव था, जो इस सौदे में काले धन के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है।


एक ही दिन में सात लोगों को बिक्री
दान के मात्र दो महीने बाद ही, 9 मई 2016 को रविकांत फुलारा ने पूरी जमीन सात अलग-अलग लोगों को बेच दी।
इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं—

- दीपा दरम्वाल, जिला पंचायत अध्यक्ष, हल्द्वानी (0.253 हेक्टेयर)
- हरेन्द्र सिंह कुंजवाल, पुत्र गोविंद सिंह कुंजवाल
- मीनाक्षी अग्रवाल, पत्नी भूपेश अग्रवाल
- अरविन्द सिंह मेहरा, पुत्र बलवंत सिंह मेहरा
- अजय कुमार गुप्ता, पुत्र मंगत राम गुप्ता
- चेतन गुप्ता, पुत्र बाबूलाल गुप्ता
- अनिता गुप्ता, पत्नी सतीश चंद्र गुप्ता
इन सभी को जमीन की बिक्री से कुल ₹3,25,66,000 की बड़ी रकम प्राप्त हुई।

राजनैतिक रसूख और भ्रष्ट गठजोड़ के आरोप
शिकायत में कहा गया है कि इस पूरे खेल में राजनैतिक रसूखदारों, भू-माफियाओं और भ्रष्ट अफसरों की मिलीभगत से सरकारी जमीन को निजी हाथों में सौंपा गया।
साथ ही यह भी संदेह जताया गया है कि रविकांत फुलारा को बंधक बनाकर धमकी दी गई और बिक्री से मिली करोड़ों की रकम वापस ले ली गई।
जांच के आदेश
काठगोदाम थानाध्यक्ष विमल मिश्रा ने पुष्टि की है कि आईजी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

जालसाजी के मुख्य बिंदु
- सीलिंग कानून का उल्लंघन: बलवंत सिंह ने झूठा दावा किया कि उनके पास 12.5 एकड़ से कम जमीन है।
- अफसरों की मिलीभगत: राजस्व अधिकारियों ने पुराने बेदखली आदेश को छिपाकर फर्जी विनियमितिकरण कराया।
- दान और तत्काल बिक्री: जमीन मिलने के बाद पहले दान, फिर एक ही दिन में सात लोगों को बिक्री।
- काले धन का इस्तेमाल: करोड़ों की डील में संदिग्ध लेनदेन और स्टैंप शुल्क के पीछे काले धन की भूमिका की आशंका।
निष्कर्ष
हल्द्वानी का यह मामला सिर्फ एक जमीन घोटाला नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र की मिलीभगत का प्रतीक बनकर सामने आया है। अब देखने वाली बात होगी कि जांच कितनी पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ती है और सरकारी जमीन लूटने वाले रसूखदारों पर क्या कार्रवाई होती है।


