चंपावत के सीमांत गांव खेत की दयनीय स्थिति, डीएम ने लिया संज्ञान

चंपावत के सीमांत गांव खेत की दयनीय स्थिति, डीएम ने लिया संज्ञान

स्थान:लोहाघाट ( चंपावत)
रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट

चंपावत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सीमांत के अंतिम गांव को “पहला गांव” मानकर उसका भरपूर विकास करने के निर्देश देने के बावजूद, चंपावत जिले की लोहाघाट विधानसभा में स्थित नेपाल सीमा से लगे निडिल ग्राम सभा का खेत गांव आज भी सुविधाओं के अभाव में जूझ रहा है।

गांव के निवासी भरत सिंह घटाल, केसर सिंह घटाल, वीरेंद्र सिंह घटाल और हीरा सिंह घटाल ने बताया कि पिछले पांच महीने से यहां नेटवर्क नहीं है, जिससे बाहरी संपर्क मुश्किल हो गया है। गंभीर स्थिति में मदद पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को 3-4 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। गांव में सड़कें खस्ताहाल हैं, पैदल रास्ते कठिन हैं और बच्चों को स्कूल जाने के लिए 7 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है।

गांव में लगभग 15 परिवार रहते हैं, जिन्हें न तो सड़क, न स्कूल, न चिकित्सा सुविधा और न ही नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। क्षेत्र कृषि प्रधान है और धान, मक्का, मड़वा, आम व केले प्रचुर मात्रा में होते हैं, लेकिन सड़क सुविधा न होने के कारण उत्पादन बाजार तक नहीं पहुँच पाता।

गांववासियों ने कहा कि जनप्रतिनिधि केवल वोट के समय ही आते हैं, इसके बाद उनकी सुध कोई नहीं लेता। महाकाली नदी के दूसरी ओर नेपाल में बेहतर नेटवर्क और सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि सीमांत क्षेत्र अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित है।

इस मामले पर चंपावत के जिलाधिकारी मनीष कुमार ने संज्ञान लिया है और उन्होंने कहा कि वे जल्द ही खेत गांव जाकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करेंगे। फिलहाल ग्रामीणों की उम्मीदें सिर्फ जिलाधिकारी मनीष कुमार पर टिकी हुई हैं।