

लोकेशन-ऋषिकेश

संवाददाता- सागर रस्तोगी


बनखंडी रामलीला कमेटी को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। एक पक्ष बिना अनुमति के रामलीला का मंचन करने में लगा है, जबकि दूसरे पक्ष ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मंचन को रोकने में असमर्थता की आलोचना की है।


इस संबंध में विवादित पक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई अहम जानकारियां सार्वजनिक कीं। पूर्व पार्षद हरीश तिवारी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 की रामलीला के बाद धीरे-धीरे दूसरे पक्ष ने वाद-विवाद की स्थिति पैदा की। उन्होंने बताया कि यूसीसी का कैंप लगाने के लिए गलत तारीख का प्रचार किया गया और रामलीला परिसर के गेट का ताला तोड़कर अंदर घुसा गया।


मामले में 30 में दोनों पक्षों के 13-13 लोगों पर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा, बाली पाल की शिकायत पर मुकदमा भी दूसरे पक्ष पर दर्ज है। आरोप है कि दूसरे पक्ष ने कूट रचित दस्तावेज के जरिए समिति का नवीनीकरण कराया और फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग किया। सीए की ऑडिट रिपोर्ट में कहीं भी यूडिन नंबर का जिक्र नहीं है।


एसडीएम की भूमिका और ज्यूरी रिपोर्ट:
रामलीला मंचन की अनुमति के लिए दोनों पक्षों ने एसडीएम ऋषिकेश से आवेदन किया था। एसडीएम ने इस मामले में ज्यूरी का गठन किया, जिसमें प्रभारी निरीक्षक, तहसीलदार और सहायक नगर आयुक्त के साथ दोनों पक्षों के चार-चार लोग शामिल थे। ज्यूरी ने कोतवाली ऋषिकेश में बैठक कर प्रयास किया कि दोनों पक्षों में सहमति बन जाए।

लेकिन सहमति न बनने पर ज्यूरी ने अपनी रिपोर्ट एसडीएम को भेज दी। इसके बाद एसडीएम ने स्पष्ट कर दिया कि दोनों पक्षों को रामलीला मंचन की अनुमति नहीं दी जाएगी।


इस विवाद ने रामलीला कमेटी की विश्वसनीयता और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे का समाधान कैसे निकाला जाएगा।


