पौड़ी आकाशवाणी केंद्र की स्थिति चिंताजनक, तकनीकी सुधार की उठी मांग

पौड़ी आकाशवाणी केंद्र की स्थिति चिंताजनक, तकनीकी सुधार की उठी मांग

रिपोर्ट : भगवान‌ सिंह
स्थान : पौड़ी गढ़वाल

गढ़वाल मंडल का पहला आकाशवाणी केंद्र, जो वर्ष 1996 में पौड़ी में स्थापित किया गया था, आज लगभग 30 वर्ष बाद भी मूलभूत संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। एक ओर देश डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है, वहीं यह ऐतिहासिक केंद्र आज भी पुराने उपकरणों और ढांचे के भरोसे संचालित हो रहा है।

वरिष्ठ उद्घोषक सुलोचना पायल ने बताया कि केंद्र में अब कई तकनीकी खामियां सामने आने लगी हैं। एफएम ट्रांसमिशन के लिए एक मजबूत टावर की नितांत आवश्यकता है, जिससे ‘पहाड़ों की गूंज’ जैसे कार्यक्रमों का प्रसारण देहरादून की तर्ज पर पहाड़ों तक साफ-सुथरे ढंग से पहुंच सके।

उन्होंने बताया कि केंद्र का जनरेटर जर्जर हालत में है, और कंप्यूटर मशीनरी तथा इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में भी व्यापक सुधार की जरूरत है। पायल ने विभाग और क्लस्टर हेड से पौड़ी केंद्र को देश के अन्य आकाशवाणी स्टेशनों की तरह उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

वहीं नियमित श्रोता विकास रावत और मनोज कुमार ने बताया कि वे “अंज्वाल”, “युगवाणी”, “ग्राम जगत” और फिल्म संगीत जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से सुनते हैं। लेकिन बीते कुछ महीनों से मोबाइल ऐप पर प्रसारण स्पष्ट नहीं आ रहा। कई बार प्रसारण बीच में ही बंद हो जाता है, जिससे श्रोता निराश होते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले महीने ‘मन की बात’ कार्यक्रम भी सुनने से वंचित रह गए।

इस स्थिति से न सिर्फ स्थानीय श्रोता, बल्कि आकाशवाणी से जुड़े कर्मचारी भी चिंतित हैं। सभी ने मिलकर केंद्र की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग की है।

केंद्र प्रभारी लाखन स्वरूप गंगवार ने बताया कि पौड़ी केंद्र की सभी गतिविधियों का संचालन देहरादून से क्लस्टर हेड के माध्यम से किया जाता है। किसी भी तकनीकी खामी या प्रसारण रुकावट की स्थिति में उच्च अधिकारियों को त्वरित सूचना दी जाती है।

स्थानीय जनता और श्रोताओं की मांग है कि पौड़ी आकाशवाणी केंद्र को तकनीकी रूप से सुदृढ़ किया जाए, ताकि यह केंद्र अपने स्वर्णिम इतिहास को बरकरार रखते हुए भविष्य में भी पहाड़ी क्षेत्रों की आवाज बन सके।