

स्थान-हल्द्वानी

संवाद्दाता-ऋषि कपूर



नैनीताल जिले के हल्द्वानी क्षेत्र स्थित बागजाला गांव के ग्रामीण इन दिनों अपने मौलिक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में ग्रामीण पिछले 25 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई है।


ब्रिटिश काल से बसे गांव को नहीं मिला राजस्व दर्जा
ग्रामीणों का आरोप है कि बागजाला गांव ब्रिटिश काल से अस्तित्व में है, लेकिन आज तक इसे राजस्व गाँव का दर्जा नहीं दिया गया।
वर्ष 1978 में जिन परिवारों को भूमि के पट्टे दिए गए, उनका 2008 में नवीनीकरण होना था, लेकिन सरकारें केवल वादे करती रहीं। मालिकाना हक़ मिलने के बजाय ग्रामीणों को नोटिस और बुलडोज़र का सामना करना पड़ा।


भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों के अनुसार:
2023 में कई निर्माणाधीन मकान ढहा दिए गए।
2024 में 100 से अधिक परिवारों को सरकारी नोटिस थमाए गए।

700 से अधिक परिवार यहां वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सुविधा नहीं मिल रही।
बागजाला को पंचायत चुनाव से भी बाहर कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों का मताधिकार भी छीन लिया गया।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगे:
अतिक्रमण के नाम पर जारी नोटिसों को रद्द किया जाए।
निर्माण कार्यों पर लगी रोक को हटाया जाए।
सड़कों की मरम्मत कर पक्की सड़क बनाई जाए।
‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना को फिर से शुरू किया जाए।
पंचायत चुनाव में ग्रामीणों का मताधिकार बहाल किया जाए।
बागजाला को राजस्व गाँव घोषित कर मालिकाना हक़ दिया जाए।
गोवंश अधिनियम में संशोधन कर किसानों-पशुपालकों को राहत दी जाए।
ग्रामीणों की चेतावनी: समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा
धरने में शामिल लोगों का कहना है:
“हम अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से लड़ रहे हैं। अगर सरकार ने हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो यह आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।“


