65 साल से बसी बस्तियां, लेकिन मालिकाना हक़ से अब भी वंचित!

65 साल से बसी बस्तियां, लेकिन मालिकाना हक़ से अब भी वंचित!

नोटिस के बाद भड़का ग्रामीणों का ग़ुस्सा, प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

रामनगर, 11 सितंबर 2025
रामनगर तहसील के मालधनचौड़ और शिवनाथपुर पुरानी बस्ती में पिछले 65 वर्षों से रह रहे करीब 500 परिवारों के सामने एक बार फिर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। खेत जोतने, घर बसाने और पीढ़ियों को पालने के बावजूद इन परिवारों को आज तक ज़मीन का मालिकाना हक़ नहीं मिला है। अब प्रशासन की ओर से जारी अतिक्रमण हटाने के नोटिस ने ग्रामीणों की चिंता और नाराज़गी दोनों बढ़ा दी है।

हर सुविधा है, पर अधिकार नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि यहां सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और आंगनबाड़ी तक की सभी सरकारी सुविधाएं मौजूद हैं। बच्चों की पढ़ाई, बुज़ुर्गों की दवाई और परिवार की रोज़ी-रोटी — सब कुछ यहीं से चलता है। बावजूद इसके, इन लोगों के पास उस ज़मीन का कोई काग़ज़ी अधिकार नहीं, जिस पर वे दशकों से रह रहे हैं।

“हमने ज़िंदगी यहीं गुज़ारी है… अब कहां जाएं?”
ग्रामीणों का कहना है कि वो पूरी तरह खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं। कुछ लोगों ने सरकार की योजनाओं के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना में घर भी बनाए हैं। लेकिन अब अचानक अतिक्रमण के नोटिस मिलने से उनके सिर से छत छिनने का खतरा बन गया है।

फर्जी शिकायतों का खेल?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सीएम हेल्पलाइन का दुरुपयोग कर कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग फर्जी शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं। शिकायतें वापस लेने के बदले पैसे मांगने की घटनाएं सामने आई हैं।

उन्होंने एक व्यक्ति सफी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि वह जंगल की भूमि पर अवैध कब्ज़ा कर, गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, उसके खिलाफ पहले से ही कई मुकदमे दर्ज हैं। इसी पूरे प्रकरण में हाल ही में सलीम उर्फ साहिल को प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने का नोटिस सौंपा गया, जिससे आक्रोश और गहरा गया।

तहसील में पहुंचा जन आक्रोश, चेतावनी दी
आक्रोशित ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि गरीब और असहाय परिवारों पर कार्रवाई की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अब सवाल ये है…

  • 65 साल से बसी बस्तियों को कब मिलेगा हक़?
  • क्या सरकारी योजनाओं से लाभान्वित होने के बावजूद इन परिवारों को कानूनी मान्यता नहीं दी जाएगी?
  • क्या नोटिस और माफिया की शिकायतों के बीच आम जनता की ज़िंदगी और उजड़ जाएगी?

अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह जमीन के मालिकाना हक को लेकर स्पष्ट नीति अपनाए और ऐसे लोगों को राहत दे, जो दशकों से वहां बस कर अपनी ज़िंदगी गुज़ार चुके हैं।