

स्थान-हल्द्वानी

संवाद्दाता-ऋषि कपूर



वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित किए जाने की मांग को लेकर वन अधिकार समिति, पूर्व सैनिक संगठन और स्थानीय ग्रामीणों ने सोमवार को हल्द्वानी उपजिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया।


प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि पिछले वर्ष ही समस्त दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, इसके बावजूद राजस्व ग्राम की पत्रावली फाइलों में लंबित पड़ी है।

क्या बोले प्रदर्शनकारी?
वन अधिकार समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि:


“हम दशकों से बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब जबकि सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूर्ण हो चुकी हैं, तो सरकार को और देर नहीं करनी चाहिए।”
पूर्व सैनिक संगठन और ग्रामीणों ने भी एक सुर में कहा कि अब “केवल आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
पृष्ठभूमि:
बिंदुखत्ता क्षेत्र में वर्षों से हजारों परिवार रह रहे हैं, लेकिन यह अभी तक राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं पा सका है।

वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत सरकार जनजातीय और वन भूमि पर बसे परंपरागत निवासियों को मालिकाना हक देने का प्रावधान रखती है।
स्थानीय समिति का कहना है कि बिंदुखत्ता की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या घनत्व, और सामाजिक संरचना इस अधिनियम के तहत राजस्व ग्राम बनने के सभी मापदंडों को पूरा करती है।

प्रदर्शन की प्रमुख मांगें:
बिंदुखत्ता को वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जाए।
शासन में लंबित पत्रावली को तत्काल प्रभाव से निस्तारित किया जाए।
ग्रामीणों को स्थायी आवासीय और भूमि अधिकार प्रदान किए जाएं।


