

देहरादून। उत्तराखंड में सितंबर माह में बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। मौसम विज्ञान केंद्र ने मंगलवार को नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और जगह-जगह भूस्खलन, सड़क बंद और नदियों के उफान से हालात बिगड़ रहे हैं।




सड़कों पर सबसे ज्यादा मार
भारी बारिश ने उत्तराखंड की सड़कों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानसून सीजन के बाद विशेष अभियान चलाकर सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कई जनपदों का भ्रमण कर क्षतिग्रस्त मार्गों का निरीक्षण भी किया।



सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, केवल सड़कों को ही लगभग 2000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। आपदा विभाग की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में ढाई हजार से अधिक सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनमें 6 नेशनल हाईवे भी शामिल हैं।


300 से अधिक सड़कें बंद
बारिश और भूस्खलन के कारण फिलहाल 300 से ज्यादा सड़कें पूरी तरह बंद हैं।

- 9 नेशनल हाईवे
- 86 लोक निर्माण विभाग की सड़कें
- 249 ग्रामीण सड़कें
जिला स्तर पर स्थिति गंभीर बनी हुई है। पौड़ी में 67, टिहरी में 34, चमोली में 59, हरिद्वार में 9, रुद्रप्रयाग में 51, उत्तरकाशी में 63, पिथौरागढ़ में 48, बागेश्वर में 15, नैनीताल में 28 और उधम सिंह नगर में 2 मार्ग बंद हैं।


बर्फबारी ने बढ़ाई ठंड
बारिश के साथ ही ऊंची चोटियों पर सीजन की पहली बर्फबारी भी शुरू हो गई है। गंगोत्री, बद्रीनाथ और हिमालय की अन्य ऊँची चोटियों पर बर्फ गिरने से तापमान में तेजी से गिरावट आई है। आमतौर पर अक्टूबर के मध्य तक बर्फबारी शुरू होती है, लेकिन इस बार सितंबर की शुरुआत में ही बर्फ गिर रही है।
मानसून और पश्चिमी विक्षोभ का असर
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार मानसून सामान्य से कहीं ज्यादा सक्रिय है। अगस्त में बादल सामान्य से डेढ़ गुना ज्यादा बरसे और सितंबर में भी यही सिलसिला जारी है।



मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल के अनुसार –
- 6000 मीटर की ऊँचाई पर वर्षभर हिमपात होता है।
- पिछले दो दिनों में 5000 मीटर की ऊँचाई पर हुई बर्फबारी पश्चिमी विक्षोभ की अति सक्रियता का नतीजा है।
- लगातार बारिश और बर्फबारी से सितंबर की शुरुआत में ही पहाड़ों में ठंड का असर दिखने लगा है।



