दून पुस्तकालय में विदेशी भाषा सीखने की मिल सकती है सुविधा

दून पुस्तकालय में विदेशी भाषा सीखने की मिल सकती है सुविधा

चतुर्थ आम सभा में लिए गए अहम निर्णय, रजत जयंती सप्ताह तक होंगे विशेष आयोजन

देहरादून।
राजधानी देहरादून स्थित दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र अब केवल किताबों और साहित्य तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां जल्द ही विदेशी भाषाओं की पढ़ाई भी शुरू हो सकती है। शुक्रवार को आयोजित दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की चतुर्थ आम सभा की बैठक में मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन ने पुस्तकालय को और अधिक उपयोगी तथा बहुआयामी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं के लिए विदेशी भाषा सीखना रोजगार और अवसरों की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में दून पुस्तकालय में नियमित रूप से विदेशी भाषा की कक्षाएं शुरू करने की संभावनाएं तलाशनी चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड सरकार लगातार युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसर दिलाने की दिशा में कार्य कर रही है। इस कड़ी में भाषा सबसे बड़ी बाधा बनती है। यदि दून पुस्तकालय में फ्रेंच, जर्मन, जापानी, स्पेनिश, चाइनीज जैसी भाषाओं की पढ़ाई शुरू की जाती है, तो यह न केवल प्रदेश के युवाओं को रोजगार में प्रतिस्पर्धी बनाएगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बनाएगा।

रविवार को भी खुला रहेगा पुस्तकालय

बैठक के दौरान यह प्रस्ताव भी आया कि दून पुस्तकालय को रविवार के दिन भी आम जनता और छात्रों के लिए खोला जाए। मुख्य सचिव ने इस सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि रविवार को अधिकतर लोग अवकाश पर रहते हैं, ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधार्थी और पाठक पुस्तकालय का लाभ उठा सकेंगे। यह कदम पुस्तकालय को अधिक जनोपयोगी बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।

रजत जयंती सप्ताह में होंगे विशेष आयोजन

बैठक में यह भी तय किया गया कि पुस्तकालय और शोध केंद्र की रजत जयंती वर्षगांठ के अवसर पर आगामी नौ नवंबर तक विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इसमें बच्चों, युवाओं और आम जनता—सभी वर्गों के लिए अलग-अलग विषयों पर गतिविधियाँ रखी जाएंगी।

बच्चों के लिए भाषा ज्ञान, नाटक, कहानी, पर्यावरण और संस्कृति जैसे विषयों पर प्रतियोगिताएँ व कार्यशालाएँ आयोजित होंगी। वहीं युवाओं के लिए साहित्य, इतिहास, भाषा, संस्कृति और पर्यावरण पर आधारित संगोष्ठियाँ और चर्चाएँ रखी जाएंगी।

आम जनता के लिए भी विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इनमें समाज और मानसिक स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, उपभोक्ता संरक्षण, कानून, वास्तुकला, पर्यावरण परिवर्तन और पहाड़ों में खेती जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रशासन का मानना है कि इन विषयों पर होने वाली गतिविधियाँ न केवल जागरूकता फैलाएंगी, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक होंगी।

पुस्तकालय को बनाएंगे आधुनिक

मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन ने दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र को आधुनिक तकनीक से लैस करने की भी आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय केवल किताबों का भंडार न होकर डिजिटल रिसर्च हब भी बने, जहां विद्यार्थी ई-लाइब्रेरी, डिजिटल आर्काइव और ऑनलाइन जर्नल्स जैसी आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

भाषा सीखने से बढ़ेंगे अवसर

बैठक में मौजूद अधिकारियों और शिक्षाविदों ने भी माना कि विदेशी भाषाओं का ज्ञान युवाओं के लिए रोजगार और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्रों में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। चाहे विदेशों में नौकरी हो, आईटी और बिजनेस सेक्टर हो या पर्यटन क्षेत्र—हर जगह विदेशी भाषाओं की जानकारी रखने वाले युवाओं की मांग बढ़ रही है।

सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकार भी जुड़ेंगे

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि दून पुस्तकालय और शोध केंद्र केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी बड़ा केंद्र बन सकता है। यहां पर स्थानीय कला, लोक संस्कृति, साहित्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इस दिशा में होने वाले प्रयास न केवल युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़े रखेंगे, बल्कि राज्य की पहचान को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेंगे।

आम जनता की भागीदारी पर जोर

मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि पुस्तकालय का लाभ केवल पढ़े-लिखे शोधार्थियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आम जनता तक भी पहुंचना चाहिए। इसलिए भविष्य की योजना में ऐसे कार्यक्रम शामिल होंगे, जिनमें महिलाएं, किसान, व्यापारी और सामान्य नागरिक भी भाग ले सकें।

महिला सशक्तिकरण, उपभोक्ता अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषय हर वर्ग के लिए महत्वपूर्ण हैं और इन पर चर्चा और जागरूकता अभियान पुस्तकालय की गतिविधियों का हिस्सा होंगे।