

रिपोर्ट: हरीश भण्डारी

स्थान: अल्मोड़ा

सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाला ऐतिहासिक अल्मोड़ा नंदा देवी मेला शुक्रवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आरंभ हुआ। उत्तराखंड में मां नंदा को एक बेटी के रूप में पूजा जाता है, लेकिन अल्मोड़ा में इसका स्वरूप कुछ अलग है। यहां चंद राजाओं की परंपरा के अनुसार ही मां नंदा देवी का पूजन किया जाता है।




पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां नंदा–सुनंदा की मूर्तियों का निर्माण विशेष रूप से कदली वृक्षों से किया जाता है। सबसे पहले नगर में इन कदली वृक्षों की शोभायात्रा निकाली गई, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए। शोभायात्रा के बाद नंदा देवी मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन हुआ। राजवंशज पुजारियों ने पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ पूजा संपन्न कराई।




आज मूर्ति निर्माण की परंपरा के अंतर्गत कदली वृक्षों से मां नंदा और सुनंदा की प्रतिमाएं बनाई गईं और उनकी प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद इन प्रतिमाओं को आम श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु मंदिर में रखा गया।

अष्टमी के दिन मां नंदा–सुनंदा की विशेष पूजा-अर्चना होगी। इसके बाद 3 सितंबर को मां नंदा का भव्य डोला नगर भ्रमण करेगा। डोला शोभायात्रा पूरे नगर से होते हुए पारंपरिक स्थानों पर पहुंचेगी और इसके बाद मां नंदा–सुनंदा की मूर्तियों का विधि-विधान से विसर्जन किया जाएगा।


नंदा देवी मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मिलन का भी अवसर है। इस दौरान पूरे अल्मोड़ा नगर का वातावरण भक्ति और लोक परंपराओं की गूंज से सराबोर हो जाता है।




