

रिपोर्ट : संजय कुंवर
स्थान : डुमक ज्योतिर्मठ


चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले का दूरस्थ गांव डुमक इस समय बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह कटा हुआ है। हाल की तेज बारिश से गांव के सभी पैदल संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को ब्लॉक मुख्यालय ज्योतिर्मठ या अन्य गांवों तक जाने के लिए टूटे-फूटे रास्तों और उफनते बरसाती नालों को पार करना मजबूरी बन गया है।



देश जहां एक ओर मंगल ग्रह तक कदम बढ़ा रहा है, वहीं चमोली के इस गांव में आज भी लोग रोजमर्रा की जिंदगी दांव पर लगाकर सफर करने को विवश हैं। यही पैदल संपर्क मार्ग फिलहाल गांव की लाइफलाइन बने हुए हैं।



ग्रामीणों का दर्द
उर्गम घाटी के देवग्राम निवासी रघुवीर सिंह नेगी ने बताया कि वे अपने परिजनों से मिलने डुमक पहुंचे थे। वापसी में उन्हें भी जानलेवा पैदल मार्ग और उफनते घट गदेरा नाले को पार कर किसी तरह घर लौटना पड़ा। उन्होंने कहा, “डुमक आने-जाने के रास्ते लगभग खत्म हो चुके हैं, लेकिन मरम्मत का कोई इंतजाम नहीं है।”



एक हादसा बना सबक
गांव के ही निवासी रणजीत सनवाल (42 वर्ष) की हाल ही में इसी खतरनाक रास्ते पर पैर फिसलने से मौत हो गई थी।

घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत है, लेकिन मजबूरी में उन्हें इन्हीं रास्तों से गुजरना पड़ता है।

गांव का इंतजार कब तक?
ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क मार्ग दुरुस्त करने के लिए इंतजार कब खत्म होगा, यह कहना मुश्किल है। फिलहाल डुमक गांव के लोग हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।



