


रिपोर्टर : संजय जोशी
स्थान : रानीखेत


135वें मां नंदा-सुनंदा महोत्सव की तैयारियां रानीखेत में जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। रविवार को महोत्सव समिति के सदस्यों ने रायस्टेट पहुंचकर परंपरा अनुसार कदली वृक्षों का चयन व आमंत्रण किया। पुरोहितों द्वारा शुभ मुहूर्त में चावल फेंककर योग्य वृक्ष का चुनाव किया गया। चयनित वृक्ष का गंगा जल से स्नान कराया गया तथा तिलक-चंदन एवं लाल-सफेद वस्त्र बांधकर अभिषेक कर आमंत्रित किया गया।



कदली वृक्ष को स्वर्ग फल कहा जाता है और इसे सबसे शुद्ध माना जाता है। परंपरा के अनुसार मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमा निर्माण में इन्हीं वृक्षों के तनों और पत्तों का उपयोग किया जाता है। पिछले कई वर्षों से प्रतिमाओं के लिए रायस्टेट से ही कदली वृक्ष लाए जाते रहे हैं।


कार्यक्रम की रूपरेखा


- 28 अगस्त : प्रातः पूजा-अनुष्ठान व शोभायात्रा के साथ आमंत्रित वृक्षों को मां नंदा देवी परिसर लाया जाएगा और प्रतिमा निर्माण प्रारंभ होगा।
- 31 अगस्त (नंदाष्टमी) : प्रातः काल शुभ मुहूर्त में मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।


कदली वृक्ष चयन एवं आमंत्रण की इस परंपरा में समिति संरक्षक हरीश लाल साह, महासचिव गौरव भट्ट, भुवन चंद्र साह, प्रमोद कांडपाल, मुकेश साह, पंकज साह, अनिल वर्मा और विमल भट्ट शामिल रहे।

मंदिर समिति के अनुसार यह प्रक्रिया केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और अद्भुत अनुभव से जुड़ी होती है। कहा जाता है कि जब चावल फेंके जाते हैं, तो योग्य वृक्ष स्वयं अप्रत्याशित रूप से हिलकर मां के लिए चयनित होने का संकेत देता है।



