


रिपोर्टर : अज़हर मलिक
लोकेशन : बाजपुर /उधम सिंह नगर


उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बाजपुर में चल रही भूमि बचाओ मुहिम के संयोजक जगतार सिंह बाजवा ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक पांच सूत्रीय खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने न सिर्फ तीखे सवाल उठाए, बल्कि उन पुराने जख्मों को भी कुरेदा है जो आज भी बाजपुर की जनता के दिलों में ताजा हैं।



बाजवा ने सवाल उठाया, “जब जनता की ज़मीन छीनी गई, तब चुप्पी क्यों साधी गई? और अब जब खुद पर वार हुआ तो विरोध की आवाज़ इतनी बुलंद क्यों?”


गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में जगतार सिंह बाजवा ने मंच से खुलकर यशपाल आर्य को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2012 से 2022 तक यशपाल आर्य राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर बाजपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बावजूद इसके, क्षेत्र की जनता के साथ हुए अन्याय पर वे मौन क्यों रहे?



भूमि विवाद की पृष्ठभूमि

बाजवा का आरोप है कि 2020 में, यशपाल आर्य के मंत्री रहते हुए, बाजपुर क्षेत्र के 20 गांवों की 5838 एकड़ भूमि को लेकर प्रशासन ने जबरन खाली करवाने की कार्रवाई शुरू की थी। यह वही ज़मीन थी, जिसके भूमिधरी अधिकार किसानों को 1970 में दिए गए थे। बाजवा का दावा है कि इस फैसले ने हजारों परिवारों को बेदखल कर दिया, और सैकड़ों लोग आज भी भूखमरी की कगार पर हैं।

उन्होंने पूछा कि उस समय नेता प्रतिपक्ष ने कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या सत्ता में रहते हुए उन्होंने जनता की पीड़ा को अनदेखा किया?


राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
इस पत्र के सार्वजनिक होते ही प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। विपक्ष के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले नगर निकाय चुनावों और विधानसभा उपचुनावों पर भी असर डाल सकता है।



