


रिपोर्ट : संजय कुंवर
स्थान : बद्रीनाथ धाम


पवित्र भू बैकुंठ नगरी श्री बद्रीनाथ धाम इन दिनों प्राधिकरण और मास्टर प्लान की नीतियों के चलते गहरे विवाद में है। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की धरोहरों की उपेक्षा और लगातार हो रही छेड़छाड़ से आक्रोशित स्थानीय निवासी, होटल व्यवसायी, व्यापारी समुदाय और पंडा समाज ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आंदोलन आज 16वें दिन में प्रवेश कर चुका है।


साकेत तिराहे पर मुंडन और धरना: आंदोलन को नया मोड़

श्री बद्रीश संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे इस जन आंदोलन ने सोमवार से एक नया रुख अपनाया। समिति की कोर कमेटी ने साकेत तिराहा, बद्रीनाथ धाम में मुंडन कार्यक्रम के साथ तीन दिवसीय क्रमिक धरने की शुरुआत की।


धरने के पहले दिन आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में शामिल थे:


- प्रवीण ध्यानी (संरक्षक)
- पीतांबर मोल्फा (अध्यक्ष)
- विश्वेशर नैथानी, अशोक टोडरिया, दीपक, अक्षय राजदीप मेहता (सदस्यगण)

देर सायं इन सभी को चरणामृत पिलाकर पहले दिन का धरना समाप्त किया गया। मंगलवार को क्रमशः दूसरी टीम धरने पर बैठेगी, और धरने से पहले जन रैली का आयोजन भी किया जाएगा।

जन समर्थन में उबाल, साधु-संतों ने भी दिया साथ

इस आंदोलन को अब बदरीपुरी के साधु-संतों, महात्माओं, और बुद्धिजीवियों का भी सक्रिय समर्थन मिलने लगा है। सभी ने इस आंदोलन को शांति पूर्ण ढंग से चलाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है और इसे धर्म व संस्कृति की रक्षा से जुड़ा बताया है।


प्राधिकरण की नीतियों पर गंभीर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार द्वारा लागू किया गया मास्टर प्लान न तो धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है, न ही क्षेत्र की पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक संरचना की रक्षा करता है। पौराणिक धरोहरों को या तो तोड़ा जा रहा है, या उन्हें संरक्षित करने के बजाय व्यावसायिक हितों की बलि चढ़ाया जा रहा है।


अब क्या आगे?
आंदोलन की अगली रणनीति को लेकर समिति आज देर रात कोर कमेटी की बैठक में विचार करेगी। यदि सरकार ने अब भी कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो संघर्ष और तेज़ किए जाने की चेतावनी दी गई है।


