

रिपोर्टर नाम-: आसिफ इक़बाल

लोकेशन-: रामनगर

राज्य सरकार के वन विभाग द्वारा कालागढ़ स्थित वन्यजीव प्रशिक्षण संस्थान में शुरू की गई फॉरेस्ट गार्ड्स की विशेष प्रशिक्षण पहल के तहत पहले बैच की ट्रेनिंग सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। यह संस्थान वन और वन्यजीव सुरक्षा में तैनात फॉरेस्ट गार्ड्स को आधुनिक, व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।



सुरक्षा से संरक्षण तक—हर पहलू पर मिला प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीवों की निगरानी, संरक्षण, अपराध रोकथाम, और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे अहम विषयों पर गहराई से जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण में पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ ड्रोन, कैमरा ट्रैप, GPS उपकरण, और वन्यजीव संरक्षण कानूनों से जुड़ी जानकारियां भी शामिल रहीं।



प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सैद्धांतिक ज्ञान के साथ फील्ड ट्रेनिंग भी कराई गई, जिससे गार्ड्स को मौके पर निर्णय लेने और समस्याओं को समझने का व्यावहारिक अनुभव मिला।


प्रशिक्षुओं की प्रतिक्रिया
प्रशिक्षु फॉरेस्ट गार्ड अरविंद सिंह ने बताया, “इस ट्रेनिंग ने हमें जंगल में होने वाले अपराधों की पहचान और उन्हें रोकने के लिए जरूरी तकनीकी जानकारी दी।”
वहीं फॉरेस्ट गार्ड पंकज रावत ने कहा, “यह पहली बार था जब हमें इतने आधुनिक और व्यावहारिक तरीके से वन्यजीव संरक्षण की ट्रेनिंग मिली। अब हम ज्यादा आत्मविश्वास के साथ ड्यूटी कर पाएंगे।”



निदेशक का दृष्टिकोण
संस्थान के निदेशक बिंदर पाल ने कहा कि यह प्रशिक्षण भविष्य के वन रक्षकों को जंगल की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करता है। उन्होंने कहा, “इन प्रशिक्षित गार्ड्स के रूप में हमें जंगलों की रक्षा के लिए अब और अधिक सक्षम मानव संसाधन मिलेंगे। ये गार्ड्स भविष्य में वन्यजीव संरक्षण की रीढ़ बनेंगे।”

एक मजबूत कदम जंगलों की रक्षा की ओर

यह प्रशिक्षण न केवल फॉरेस्ट गार्ड्स की व्यक्तिगत क्षमताओं को बढ़ाता है, बल्कि पूरे वन्यजीव संरक्षण तंत्र को और अधिक सशक्त बनाता है। ऐसी पहलें उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र में वन्यजीवों और जंगलों की रक्षा के लिए बेहद अहम साबित हो रही हैं।
वन विभाग की यह पहल आने वाले समय में राज्यभर के जंगलों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए एक प्रभावशाली मॉडल बन सकती है।


