लोहाघाट के सीमांत विद्यालय में दीवार ढहने के बाद भी एक साल से निर्माण कार्य ठप, मानसून में छात्रों पर खतरा मंडराया

लोहाघाट के सीमांत विद्यालय में दीवार ढहने के बाद भी एक साल से निर्माण कार्य ठप, मानसून में छात्रों पर खतरा मंडराया

स्थान: लोहाघाट (चंपावत)
रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट

चंपावत जिले में प्रशासनिक उदासीनता का एक और उदाहरण सामने आया है। लोहाघाट ब्लॉक के सीमांत क्षेत्र में स्थित राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) रोसाल की सुरक्षा दीवार और लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई पिछली दीवार एक वर्ष पूर्व आपदा के दौरान ढह गई थी, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया है। इससे विद्यालय भवन पूरी तरह से खतरे की जद में आ गया है।

विद्यालय प्रबंधन समिति (पीटीए) के अध्यक्ष मोहन चंद्र पांडे ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि एक साल बीत जाने के बाद भी सुरक्षा दीवार के निर्माण की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि मानसून के दौरान यदि कोई दुर्घटना घटती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी

पांडे ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों से आग्रह करने के बावजूद न तो निर्माण का एस्टीमेट तैयार किया गया और न ही गिरी हुई दीवार के पत्थरों को हटाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी मामले को लेकर गंभीर नहीं हैं, जिससे छात्रों की जान को सीधा खतरा उत्पन्न हो गया है।

इस संबंध में जब मामला जिले के नव नियुक्त जिलाधिकारी मनीष कुमार के संज्ञान में लाया गया, तो उन्होंने तुरंत गंभीरता से संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को समस्या के शीघ्र समाधान के निर्देश जारी किए हैं।

स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य तत्काल शुरू किया जाए, ताकि आने वाले दिनों में किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।

यह मामला न सिर्फ अधिकारियों की लापरवाही का प्रतीक है, बल्कि आपदा प्रबंधन व्यवस्था की असल तस्वीर भी उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद क्या वाकई में कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।