


स्थान : खटीमा (ऊधम सिंह नगर)
रिपोर्ट : अशोक सरकार

राज्य आंदोलन में शहादत देने वाले शहीद सलीम के परिवार की घोर उपेक्षा एक बार फिर उत्तराखंड सरकार के “राज्य आंदोलनकारियों के प्रति सम्मान” के दावों को आईना दिखा रही है। सलीम के घर का लिंटर चार महीने पहले क्षतिग्रस्त होकर गिर चुका है, लेकिन प्रशासन ने अब तक किसी प्रकार की वास्तविक मदद नहीं पहुंचाई है।


शहीद सलीम के पिता अब्दुल रशीद का कहना है कि उन्होंने उपजिलाधिकारी खटीमा समेत कई अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। उन्हें कई बार कहा गया कि “आपका लिंटर जल्द ही बनवाया जाएगा”, लेकिन अब तक जमीन पर कोई काम शुरू नहीं हुआ।



इस बीच सलीम का पूरा परिवार बरामदे में रहने को मजबूर है। जैसे-जैसे बरसात का मौसम नजदीक आ रहा है, परिवार पर संकट और गहराता जा रहा है। एक ओर जहां राज्य सरकार खुद को राज्य आंदोलनकारियों का हितैषी बताती है, वहीं एक शहीद परिवार की इस तरह की उपेक्षा से जनता में आक्रोश है।


सरकार के दावों पर सवाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अक्सर मंचों से कहते हैं कि राज्य आंदोलनकारियों और उनके परिजनों को हर संभव मदद दी जाएगी, लेकिन सलीम के परिवार की स्थिति इस दावे को झूठा साबित करती नजर आ रही है।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन की खामोशी और संवेदनहीनता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि “अगर शहीद का परिवार भी इस तरह उपेक्षित रहेगा तो आम जनता की उम्मीद सरकार से कैसे बनी रहेगी?”



जनता में आक्रोश, परिवार की सुध लेने की मांग
अब जब बरसात सिर पर है और परिवार खुले आसमान के नीचे जीने को मजबूर है, जनता और स्थानीय संगठन सरकार से तत्काल संज्ञान लेने की मांग कर रहे हैं।


राज्य की जनता पूछ रही है –
- क्या यही है राज्य आंदोलनकारियों के बलिदान का सम्मान?
- क्या सिर्फ घोषणाओं और भाषणों से ही मिलेगा न्याय?

सरकार को चाहिए कि वह शहीद सलीम के परिवार की तत्काल मदद करे और उनके लिए स्थायी आवासीय समाधान सुनिश्चित करे। वरना यह चुप्पी न केवल एक संवेदनहीन प्रशासन का प्रतीक बनेगी, बल्कि राज्य आंदोलन के प्रति सरकार की गंभीरता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करेगी।



