

रूद्रप्रयाग

चारधाम यात्रा और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं ने हवाई सेवाओं की सुरक्षा, निगरानी और संचालन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में हुई घटनाओं के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों की जवाबदेही को लेकर जन आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ रहे हैं।



क्या पहाड़ों में सिंगल इंजन हेलीकॉप्टरों की उड़ान उचित है?
विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी इलाकों में सिंगल इंजन हेलीकॉप्टरों की उड़ान अत्यधिक जोखिमपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि किसी तकनीकी खराबी की स्थिति में बैकअप इंजन का न होना सीधे जानमाल के नुकसान का कारण बन सकता है।



यात्री भार मानकों का उल्लंघन
DGCA के अनुसार, हेलीकॉप्टर में अधिकतम 4 व्यस्क + 2 बच्चे + 2 शिशु (4+2+2) के मानक निर्धारित हैं। लेकिन वास्तविकता में 6 व्यस्कों को बिठाया जा रहा है, जिससे न सिर्फ हेलीकॉप्टर की क्षमता पर असर पड़ता है बल्कि उड़ान के दौरान संतुलन और सुरक्षा भी प्रभावित होती है।


मौसम की अनदेखी और निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन
हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों द्वारा खराब मौसम में उड़ानें संचालित की जा रही हैं और निर्धारित समय सीमा (सुबह से शाम तक) के बाहर भी उड़ानें हो रही हैं, जो DGCA के मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है।

अनुपयुक्त पायलट से उड़ान
कई मामलों में अनुभवहीन या अधूरी पात्रता वाले पायलटों से उड़ान करवाई जा रही है, जो कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा जोखिम है। पर्वतीय इलाकों में उड़ान के लिए विशेष हाई-एल्टीट्यूड प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
फिटनेस और सर्विसिंग की अनदेखी
सूत्रों के अनुसार, हेलीकॉप्टरों की फिटनेस जांच और नियमित सर्विसिंग निर्धारित समय सीमा पर नहीं की जा रही है। इससे न केवल मशीनों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है बल्कि तकनीकी खराबियों की आशंका भी बढ़ जाती है।


जरूरी सवाल: कितनी और दुर्घटनाएं होने के बाद होगा सुधार?
इन बिंदुओं के आधार पर यह स्पष्ट है कि प्रभावी निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही के बिना हेलीकॉप्टर सेवाएं यात्रियों के लिए खतरा बनती जा रही हैं।
यदि DGCA, राज्य सरकारें और ऑपरेटर समय रहते मानकों का कड़ाई से पालन, नियमित ऑडिट, और मौसम की स्थिति पर निगरानी नहीं करते, तो यह लापरवाही और अधिक जानलेवा साबित हो सकती है।


