

स्थान : लोहाघाट (चंपावत)
रिपोर्ट : लक्ष्मण बिष्ट


सरकार भले ही “हर घर नल, हर घर जल” योजना के तहत शत-प्रतिशत पेयजल सुविधा का दावा कर रही हो, मगर लोहाघाट के प्रेम नगर की जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। क्षेत्र के करीब 300 परिवार आज भी एक बूंद पानी के लिए गाड़-गधेरों और नालों पर निर्भर हैं।

पेयजल के लिए संघर्षरत प्रेम नगर, 25 साल से प्यासा
पॉलिटेक्निक गेट से लेकर पाटन पुल तक फैले इस क्षेत्र की बड़ी आबादी पिछले 25 वर्षों से पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है। न तो कोई स्थायी पेयजल योजना बनाई गई और न ही हर घर नल योजना का लाभ इन तक पहुंच पाया है।


स्थानीय निवासी उर्बादत जोशी के नेतृत्व में रविवार को प्रेम नगर के आक्रोशित नागरिकों ने प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और शीघ्र पेयजल योजना निर्माण की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार की जल योजनाएं कागज़ों तक ही सीमित हैं, जबकि धरातल पर प्रेम नगर जैसी आबादी पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।


सरकार से चेतावनी : जल्द समाधान नहीं तो उग्र आंदोलन
प्रदर्शन कर रहे नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस क्षेत्र के लिए पेयजल योजना नहीं बनाई गई, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी। क्षेत्रवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर हर घर जल योजना से बाहर रखा गया है।

पूर्व सैनिकों और कर्मियों का इलाका, फिर भी उपेक्षित
प्रेम नगर क्षेत्र में पूर्व सैनिक, सरकारी कर्मचारी और सामाजिक रूप से जागरूक नागरिकों की बड़ी संख्या निवास करती है, बावजूद इसके यहां बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जो शासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

प्रदर्शन में शामिल प्रमुख लोग
प्रदर्शन में बिशन सिंह अधिकारी, नरेंद्र सिंह चौधरी, हरिश्चंद्र, बची राम गढ़कोटी, दीवान सिंह, सुरेश जोशी, हरीश अधिकारी, विक्की ओली, मोहन जोशी, देव सिंह अधिकारी सहित कई स्थानीय नागरिक शामिल रहे, जिन्होंने मिलकर एक स्वर में कहा कि अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


सरकार को चाहिए कि वह शीघ्र इस गंभीर समस्या का समाधान कर प्रेम नगरवासियों को उनका जल अधिकार दे, वरना वर्षों से प्यासे इस क्षेत्र की आवाज अब आंदोलन के रूप में गूंजेगी।


