

स्थान : लोहाघाट( चंपावत)
रिपोर्ट : लक्ष्मण बिष्ट


लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में शनिवार रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई जब ऑन ड्यूटी वार्ड बॉय दिनेश कुमार ने 112 आपातकालीन सेवा से मदद मांगी और जवाब में खुद पुलिस कर्मियों की पिटाई का शिकार हो गया।


घटना रात लगभग 11:30 बजे की है, जब रेगांव क्षेत्र से कुछ लोग एक छात्रा को उपचार के लिए अस्पताल लाए थे। वार्ड बॉय दिनेश कुमार का आरोप है कि छात्रा के साथ आए तीन तीमारदार नशे में थे और उन्होंने उसके साथ अभद्रता व मारपीट करने की कोशिश की। अस्पताल के गार्ड ने किसी तरह उसे छुड़ाया।

इसके बाद दिनेश कुमार ने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस सहायता मांगी। थोड़ी देर में पहुंची 112 टीम ने न सिर्फ वार्ड बॉय की बात सुने बिना ड्यूटी रूम का दरवाजा तोड़ा, बल्कि उस पर हाथ भी उठा दिया। दिनेश के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने उसे बेरहमी से पीटा, जिससे उसके कान में गंभीर चोटें आई हैं।


इतना ही नहीं, वार्ड बॉय का आरोप है कि मौके पर पहुंचे डॉक्टर के साथ भी पुलिसकर्मियों ने अभद्रता की। दिनेश ने पुलिस कर्मियों पर शराब के नशे में होने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
रविवार को दिनेश कुमार ने लोहाघाट थाने में मामले की तहरीर दी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उसकी शिकायत को दर्ज तक नहीं किया। इसके बाद दिनेश ने जिलाधिकारी चंपावत, पुलिस अधीक्षक चंपावत, सीएमओ और चिकित्सा अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।

घटना के बाद स्वास्थ्य कर्मियों में रोष और भय का माहौल है। उन्होंने कहा कि अगर वार्ड बॉय की कोई गलती भी थी, तो ऑन ड्यूटी स्वास्थ्यकर्मी के साथ इस तरह की मारपीट पुलिस द्वारा नहीं की जानी चाहिए थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने आरोपी पुलिस कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने यह भी कहा कि सरकार ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि पुलिस को स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, लेकिन यहां तो मदद मांगने पर ही पीटा जा रहा है।

इस मामले पर लोहाघाट थाना अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और जांच की जाएगी। थाना अध्यक्ष के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में वार्ड बॉय नशे में था और उसने पुलिसकर्मियों से अभद्रता की। उन्होंने कहा कि जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि गलती किसकी थी, लेकिन यह तय है कि ड्यूटी पर तैनात किसी भी स्वास्थ्यकर्मी के साथ इस प्रकार की हिंसा गंभीर चिंता का विषय है।
जांच के बाद ही तय होगा दोषी कौन, पर सवाल ये है कि जब मदद की दरकार हो, तो सुरक्षा देने वाली ही संस्था हमला क्यों कर रही है?


